शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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कब्ज के साथ पेट फूले पर दर्द न हो, तो डॉक्टर के पास कब जाएं: डॉ. अरविंद की राय

कब्ज के साथ पेट फूले पर दर्द न हो, तो डॉक्टर के पास कब जाएं: डॉ. अरविंद की राय तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 टीम

बंगलुरु के अस्टर आरवी अस्पताल के डॉ. अरविंद एस. एन ने बताया कि कब्ज और पेट फूलने पर दर्द न हो, तब भी किन हालात में डॉक्टर से मिलना चाहिए।

आजकल खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान की आदतों की वजह से कई लोगों को कब्ज और पेट फूलने जैसी दिक्कतें हो रही हैं। अक्सर कब्ज के साथ पेट भी फूलता है। ऐसे में बहुत से लोगों को समझ नहीं आता कि डॉक्टर की सलाह आखिर कब लेनी चाहिए। इस बारे में बंगलुरु के अस्टर आरवी अस्पताल में अंतर्गत मेडिसिन के मुख्य सलाहकार डॉ. अरविंद एस. एन ने जानकारी दी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट दर्द के बिना कब्ज या पेट की तकलीफ होना पाचन से जुड़ी आम समस्या है। जब शौच कम हो जाए, कड़ा आने लगे या हो ही न, तो साफ समझ आता है कि पेट साफ नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आमतौर पर गलत खानपान की आदतों से होता है। लेकिन ये लक्षण लगातार दिख रहे हों या नए सिरे से शुरू हुए हों, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कब्ज और पेट फूलने के कई कारण हो सकते हैं: फाइबर की कमी, पर्याप्त पानी न पीना, शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना, जीवनशैली में बदलाव और शौच की इच्छा को दबाकर रखना। कुछ खास दवाएं, जैसे आयरन सप्लिमेंट्स, कुछ एंटासिड और ओपिओइड दर्दनिवारक भी कब्ज की वजह बन सकती हैं। डॉ. अरविंद के मुताबिक, जब मल सामान्य से ज्यादा देर तक आंतों में रहता है, तो पेट फूल सकता है, गैस बनती है और पेट भरा-भरा लगता है।

इंटरनल मेडिसिन में छपी 2023 की एक स्टडी के अनुसार, अगर शौच में खून आना, वजन घटना, अचानक कब्ज होना या पेट में गांठ जैसे गंभीर लक्षण दिखें, तो कब्ज और पेट फूलने को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यही बात तब भी लागू होती है जब जीवनशैली बदलने और फाइबर वाला खाना लेने के बाद भी समस्या लंबे समय तक बनी रहे। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। स्टडी के मुताबिक, डॉक्टर लक्षणों की गंभीरता देखकर शारीरिक जांच और कुछ खास टेस्ट के जरिए असली वजह का पता लगाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों के जरिए खाने में फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाने से कभी-कभार होने वाली कब्ज में सुधार हो सकता है। पर्याप्त तरल पीना, नियमित कसरत और नियमित शौच भी फायदेमंद हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि फाइबर धीरे-धीरे ही बढ़ाना चाहिए, क्योंकि कुछ लोगों में अचानक बढ़ाने पर पेट फूलने की दिक्कत बढ़ सकती है।

डॉ. अरविंद ने साफ किया कि अगर कब्ज दो से तीन हफ्ते से ज्यादा चले, बार-बार लौटे या शौच की आदतों में कोई खास बदलाव आए, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। उनके मुताबिक डॉक्टर खानपान की आदतों, दवाओं और शौच के तरीके का आकलन करेंगे और जरूरत पड़ने पर शारीरिक जांच कर सकते हैं या टेस्ट की सिफारिश कर सकते हैं। कब्ज वाले हर व्यक्ति को स्कैन या कोलोनोस्कोपी की जरूरत नहीं होती। टेस्ट लक्षणों, उम्र और जोखिम के कारकों पर निर्भर करते हैं।

डॉ. अरविंद के अनुसार, कई मामलों में दर्द न होना राहत की बात होती है, पर इससे किसी मेडिकल समस्या की संभावना खारिज नहीं होती। अगर कब्ज और पेट फूलना बना रहे, सुधार न हो या खतरे के संकेत दिखने लगें, तो मेडिकल सलाह लेना जरूरी है। जिन लोगों की उम्र 45 साल या उससे ज्यादा है और जिन्हें नई या लंबे समय तक रहने वाली कब्ज महसूस होती है, उन्हें डॉक्टर से मिलना चाहिए। खासकर तब, जब उनकी कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग करानी हो या दूसरे जोखिम कारक हों।

खतरे के लक्षणों में शौच में खून आना, बिना वजह वजन घटना, लगातार थकान, एनीमिया (रक्तक्षय), पेट की सूजन का लगातार बढ़ते जाना और शौच की आदतों में खास बदलाव शामिल हैं। डॉ. अरविंद के मुताबिक, अगर परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) या इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आंतों की सूजन) का इतिहास रहा हो, तो डॉक्टर से बात करना जरूरी है।

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