शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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बिना लाइसेंस कृषि उपज खरीदी तो सीधे फौजदारी कार्रवाई, व्यापारियों को चेतावनी

बिना लाइसेंस कृषि उपज खरीदी तो सीधे फौजदारी कार्रवाई, व्यापारियों को चेतावनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

कृषि उपज की खरीद-बिक्री में बिना लाइसेंस के कारोबार करने वालों पर अब सीधी फौजदारी और कानूनी कार्रवाई होगी।

उपज की खरीद-बिक्री के कारोबार में नियमों को ताक पर रखकर बिना लाइसेंस के लेन-देन करने वाले व्यापारियों, संस्थाओं और किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीओ) पर प्रशासन ने अब सख्ती शुरू कर दी है। इन पर सीधी फौजदारी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अधिसूचित और नियममुक्त उपज खरीदने के लिए कृषि उत्पन्न बाजार समिति या विपणन निदेशालय का अधिकृत लाइसेंस होना अब कानूनन जरूरी कर दिया गया है। बाजार समिति के परिसर में या उसके बाहर तय किए गए कार्यक्षेत्र में अनाज और बाकी सभी तरह की उपज खरीदते समय यह नियम सख्ती से लागू रहेगा। आढ़तियों की दुकानों, गोदामों और प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए भी लाइसेंस जरूरी है।

महाराष्ट्र कृषि उत्पन्न विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम 1963 के प्रावधानों के मुताबिक लाइसेंस के बिना कारोबार करना गुनाह माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि किसानों की आर्थिक धोखाधड़ी रोकने और लेन-देन पर नजर रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

इस नए नियम से खरीद-बिक्री के सभी सौदों में एकरूपता और पारदर्शिता आएगी। किसान और व्यापारी के बीच झगड़ा हुआ तो कानूनी सुरक्षा मिलना आसान होगा और सरकार के पास हर सौदे का अधिकृत रिकॉर्ड रहेगा। लाइसेंस लेने के लिए कारोबारियों को बाजार समिति में तय फॉर्म में आवेदन, जरूरी कागजात और तय फीस जमा करनी होगी। कारोबार की किस्म के हिसाब से व्यापारी, आढ़तिया और प्रोसेसर के लिए लाइसेंस के अलग-अलग प्रकार और नियम लागू हैं।

इसके अलावा लाइसेंसधारक व्यापारी जब किसानों से उपज खरीदें, तो उन्हें उसी वक्त 'पक्की रसीद' देना कानून से जरूरी किया गया है। इसमें उपज का वजन, क्वालिटी और दर साफ लिखा होना चाहिए। रसीद न देने वालों या आपस में सीधा सौदा करने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी, इसलिए बिना लाइसेंस के धंधा करने वालों में घबराहट है।

उधर केंद्र सरकार ने आने वाले रब्बी सीजन के लिए गेहूं, चना, मसूर, सरसों, कुसुम और बार्ली, इन छह मुख्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। लेकिन इस साल बारिश ने खींच ली, सूखे जैसे हालात हैं, सिंचाई के लिए पानी की किल्लत है और जमीन की नमी कम हो गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बढ़े हुए एमएसपी का किसानों को सचमुच कितना फायदा होगा।

पानी की कमी से इस बार रब्बी की बुआई पर ही बड़ा संकट है। पीने के पानी को पहले रखना पड़ा तो खेती के लिए पानी मिलना मुश्किल होगा। कई असिंचित किसान इसी उलझन में हैं कि बुआई करें या नहीं। पैदावार घटी तो बाजार में आमद कम होगी और खुले बाजार में व्यापारियों से एमएसपी से ज्यादा दाम मिल सकते हैं, पर इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए सूखे और बढ़ते खर्च के बीच एमएसपी की यह बढ़ोतरी किसानों के लिए सिर्फ 'नाममात्र का दिलासा' साबित हो रही है।

खरीफ के नुकसान के बाद किसानों को रब्बी से उम्मीद थी। मगर गेहूं के एमएसपी में प्रति क्विंटल सिर्फ 25 रुपये और चने में 83 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यानी एकड़ में पांच क्विंटल चना हुआ तो किसान को सिर्फ 415 रुपये ज्यादा मिलेंगे। दूसरी तरफ जुताई, बीज, खाद और मजदूरी का खर्च काफी बढ़ गया है। इसलिए चिंता यही है कि यह मामूली बढ़ोतरी उत्पादन खर्च की भरपाई कर पाएगी या नहीं।

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