शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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उजनी में फ्लोटिंग सोलर और डेटा सेंटर, कलेक्टर बोले 9 फीसदी जलक्षेत्र पर ही बनेगा प्रोजेक्ट

उजनी में फ्लोटिंग सोलर और डेटा सेंटर, कलेक्टर बोले 9 फीसदी जलक्षेत्र पर ही बनेगा प्रोजेक्ट तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

सोलापुर के कलेक्टर एस. कार्तिकेयन ने उजनी बांध के प्रस्तावित सोलर, बैटरी स्टोरेज और डेटा सेंटर प्रोजेक्ट पर उठे सवालों के जवाब दिए।

उजनी बांध इलाके में फ्लोटिंग सोलर, बैटरी स्टोरेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआय) पर आधारित डेटा सेंटर का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। जिलाधिकारी एस. कार्तिकेयन ने बताया कि इससे सोलापुर के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। प्रोजेक्ट से दो हजार मेगावॅट बिजली बनने, 2800 स्थायी नौकरियों और करीब 40 हजार सीधे-परोक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

कार्तिकेयन के मुताबिक उजनी के कुल जलक्षेत्र में से सिर्फ नौ फीसदी हिस्से पर सोलर प्रोजेक्ट लगेगा और बाकी 91 फीसदी जलाशय खुला रहेगा। उजनी का जलक्षेत्र 33 हजार 630 हेक्टर है, जिसमें से तीन हजार हेक्टर पर प्रोजेक्ट बनना है।

प्रोजेक्ट को लेकर पानी के इस्तेमाल, किसानों के नुकसान, विस्थापन, मछली पकड़ने और पर्यावरण पर असर जैसे कई सवाल उठ रहे थे। इसी वजह से जिला प्रशासन ने प्रोजेक्ट का स्वरूप और लोगों की शंकाओं पर सफाई दी है। राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 16 अप्रैल 2026 को सामंजस्य करार (MoU) किया है।

प्रस्ताव में दो हजार मेगावॅट का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट, 1800 मेगावॅट की बैटरी स्टोरेज व्यवस्था और 1.4 गिगावॅट क्षमता का अत्याधुनिक डेटा सेंटर शामिल है। सोलर से बनी बिजली डेटा सेंटर में इस्तेमाल होगी और जो बिजली बचेगी, उसे बैटरी में रखा जाएगा।

पानी को लेकर प्रशासन ने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए छह टीएमसी पानी लगने की बात गलत है। असल में सालाना 0.42 टीएमसी पानी की जरूरत है और ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल 0.5 टीएमसी तक रहेगा। मौजूदा पानी बंटवारे में कोई कटौती नहीं होगी। डेटा सेंटर में पानी कम लगे, इसके लिए आधुनिक बंद कूलिंग तकनीक इस्तेमाल होगी। फ्लोटिंग सोलर से भाप बनकर उड़ने वाला पानी 30 से 70 फीसदी तक घटेगा और साल में करीब 1.5 टीएमसी पानी बचने की उम्मीद है।

भीमानगर के लोगों को हटाया नहीं जाएगा, ऐसा प्रशासन ने साफ किया है। जलसंपदा विभाग की जगह पर रह रहे 311 परिवारों के लिए 51.18 एकड़ जमीन बिना किसी मुआवजे के दी गई है। यह जमीन का मसला 40 साल से अटका था। पहले चरण में भीमानगर-रांझणी, तरटगांव और हिंगणगांव की कुल 415.75 एकड़ सरकारी जमीन इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। प्रशासन ने कहा कि इसके अलावा निजी जमीन का नया अधिग्रहण नहीं होगा।

उजनी इलाके में ग्रीन हाइड्रोजन या स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट) लगाने की कोई योजना नहीं है, ऐसा प्रशासन ने बताया। ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट प्रस्तावित प्लान से हटा दिया गया है। डेटा सेंटर से केमिकल वाला गंदा पानी नहीं निकलेगा, कूलिंग का तरल बंद पाइप में रहेगा और उजनी जलाशय में कोई गंदा पानी नहीं छोड़ा जाएगा। पानी की क्वालिटी और पर्यावरण के मानकों पर निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जलाशय का 91 फीसदी हिस्सा खुला रहने से मछली पकड़ने और जलचरों के रहने के लिए बड़ा इलाका बचा रहेगा।

इस प्रोजेक्ट से महाराष्ट्र कृष्णा खोरे विकास महामंडळ को हर साल करीब 180 करोड़ रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। यह पैसा उजनी प्रोजेक्ट और पानी वितरण व्यवस्था की देखभाल और मरम्मत में लगेगा। कंपनी के सीएसआर फंड से स्थानीय बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

स्थानीय इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा संस्थानों के छात्रों को रोजगार और ट्रेनिंग के मौके मिलेंगे। लोगों की शंकाएं दूर करने के लिए अलग प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर और भीमानगर, तरटगांव व हिंगणगांव के स्थानीय प्रतिनिधियों की व्यवस्था बनाई जाएगी। कलेक्टर कार्तिकेयन ने भरोसा जताया कि उजनी बांध के पानी, खेती, मछली पकड़ने और पर्यावरण के हित का ध्यान रखकर ही प्रोजेक्ट लागू होगा और इससे सोलापुर के विकास को रफ्तार मिलेगी।

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