भगवान गड के दशहरा मेले में पंकजा मुंडे बोलीं, देश का सम्मान करने वाली युवा पीढ़ी चाहिए
भाजपा नेता और मंत्री पंकजा मुंडे ने भगवान गड के दशहरा मेले में युवाओं, जातिगत राजनीति और सूखे पर अपनी बात रखी।
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भाजपा नेता और मंत्री पंकजा मुंडे ने भगवान गड पर हुए दशहरा मेले में अपने समर्थकों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने युवा पीढ़ी, देशभक्ति, जातिगत राजनीति और सूखे के हालात पर अपनी राय रखी। महाराष्ट्र की राजनीति में दशहरा मेलों के भाषण और उनके राजनीतिक संदेश हर साल चर्चा में रहते हैं।
पंकजा मुंडे ने दुनिया भर में चल रहे संघर्ष और अस्थिरता का जिक्र किया। उन्होंने पेरिस और फ्रांस के हालात का हवाला दिया और रूस-यूक्रेन तथा ईरान की जंग का भी नाम लिया। उनका कहना था कि देश में ऐसी युवा पीढ़ी तैयार होनी चाहिए जो देशभक्ति की भावना रखे और देश का सम्मान करे।
उन्होंने साफ कहा, "हमें अपना ही देश जलाने वाले युवा नहीं चाहिए।" पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे के विचारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश के लिए काम करने वाले और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाले कार्यकर्ता तैयार होना जरूरी है।
पंकजा मुंडे के मुताबिक आज की युवा पीढ़ी यानी जनरेशन झेड (Gen Z) को नेतृत्व करते समय मुद्दों पर आधारित रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेतृत्व विचारों और सवालों के आधार पर हो, संघर्ष और हिंसा के रास्ते से नहीं।
जातिगत राजनीति पर भी उन्होंने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे का संकट है और ऐसे वक्त में समाज में फूट डालने की कोशिशें हो सकती हैं। इसलिए लोगों के बीच दीवारें खड़ी न होने देना और एकता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा, "हमें जाति की दीवारें तोड़नी हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि जाति के आधार पर अपनी राजनीतिक जगह बनाना चाहने वालों को आगे चलकर कामयाबी नहीं मिलेगी। समाज को सही दिशा देने के लिए पढ़े-लिखे और प्रशिक्षित नेतृत्व की जरूरत है, यह बात भी उन्होंने जोर देकर कही। उनके मुताबिक राजनीति में सिर्फ नफरत और जहर फैलाने के बजाय ठोस एजेंडा, विकास की सोच और समाज के लिए काम करने की तैयारी होनी चाहिए।
भाषण में पंकजा मुंडे ने अंतरवाली गांव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह गांव उन्होंने गोद लिया है और इसके विकास के लिए कोशिश करेंगी। उन्होंने कहा कि बीड जिले की तरह अंतरवाली से भी उन्हें लगाव है और गांव-गांव में प्यार और सामाजिक सौहार्द बढ़ाना उनकी कोशिश है। उन्होंने समाज के अलग-अलग हिस्सों के बीच तालमेल बनाकर विकास के कामों को रफ्तार देने की जरूरत भी बताई।
सूखे को लेकर पंकजा मुंडे ने कहा कि महाराष्ट्र में इस संकट के बीच किसानों और पशुधन को मदद मिलना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पहले भी वे सूखे के हालात संभाल चुकी हैं और इस बार भी संकट का सामना करने की कोशिश करेंगी।
उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से चारा अनुदान के लिए कोशिश की जाएगी। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ काम करके सूखा पीड़ितों को मदद का सहारा देने की कोशिश करेंगी। साथ ही उन्होंने नदी संवर्धन के लिए काम करने का इरादा जताया। उनके मुताबिक नदी संवर्धन और जलसंधारण के जरिए ग्रामीण इलाकों की पानी की किल्लत कम करने की पहल की जाएगी।
कुल मिलाकर उनके भाषण में देशभक्ति, युवाओं का नेतृत्व, जातिगत राजनीति का विरोध और सूखे से राहत के मुद्दे केंद्र में रहे। अब नजर इस पर है कि इन घोषणाओं के बाद जमीन पर कौन से काम होते हैं और सूखा प्रभावित इलाकों को कितनी मदद मिलती है।