भद्रावती के हॉटेल अंबिका पर बैंक के कब्जे का आरोप, तुषार सातपुते ने आरबीआई से की शिकायत
भंडारा अर्बन को-ऑपरेटिव्ह बँक और कर्जदार तुषार सातपुते के बीच हॉटेल अंबिका की कर्जवसूली को लेकर विवाद बढ़ गया है।
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चंद्रपुर: भद्रावती के होटल अंबिका की कर्ज वसूली को लेकर भंडारा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक और कर्जदार तुषार सातपुते के बीच का झगड़ा अब और बढ़ गया है। सातपुते ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि बैंक ने प्रॉपर्टी पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा लिया है। उन्होंने इस मामले की शिकायत आरबीआई से की है और गहरी जांच की मांग रखी है।
सातपुते का कहना है कि बैंक के अधिकारियों ने राजस्व और पुलिस प्रशासन को साथ लेकर होटल की प्रॉपर्टी पर कब्जा हासिल किया। उनके मुताबिक नागपुर के कर्ज वसूली न्यायाधिकरण ने बैंक की नीलामी रद्द कर दी है। इस बारे में बैंक का पक्ष अब तक सामने नहीं आ सका है।
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि सातपुते ने 16 अगस्त 2018 को बैंक से कर्ज लिया था। इस कर्ज वसूली के खिलाफ उन्होंने नागपुर के कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) में गुहार लगाई थी। मामला अदालत में चल ही रहा था कि 22 अगस्त 2024 को नायब तहसीलदार ने पुलिस बंदोबस्त के साथ होटल को ताला लगा दिया।
सातपुते के अनुसार, उन्होंने "एकमुश्त कर्ज चुकौती योजना" के तहत कर्ज चुकाने की तैयारी दिखाई थी, फिर भी बैंक ने प्रॉपर्टी की नियम के खिलाफ नीलामी घोषित कर दी। लेकिन 28 सितंबर 2026 को डीआरटी ने इस नीलामी को गैरकानूनी ठहराकर रद्द कर दिया। साथ ही बैंक को निर्देश दिया कि जब्ती की रिपोर्ट अदालत में पेश करे।
पत्रकार वार्ता में सातपुते ने बैंक पर एक और गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि विजय घाटे ने जो कर्ज लिया था, उसकी पूरी अदायगी हो जाने के बाद भी बैंक ने उनके दो प्लॉट गिरवी से मुक्त नहीं किए। उलटे, सातपुते के आरोप के मुताबिक, फर्जी कागजात के सहारे उन्हीं प्लॉट पर विजय पत्तीवार को नियम के खिलाफ कर्ज बांटकर धोखाधड़ी की गई।
इन सब बातों को देखते हुए सातपुते ने मांग की है कि भंडारा अर्बन बैंक के पिछले 5 सालों के सारे कर्ज मामलों का खास फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि दोषी बैंक मैनेजर, अधिकारियों और ऑडिटरों पर सख्त कार्रवाई हो। इस पत्रकार वार्ता में मनसे के राजू कुकडे भी मौजूद थे।