अमरावती में 30 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते, नसबंदी का टेंडर आचार संहिता में अटका
अमरावती नगर निगम का 50 लाख रुपये का नसबंदी टेंडर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव की आचार संहिता के कारण नहीं खुल सका।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अमरावती शहर में आवारा कुत्तों की तादाद बढ़ती जा रही है और कुत्तों के काटने की घटनाओं से लोगों में डर का माहौल है। अंदाजा है कि शहर में 30 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं, लेकिन उनकी नसबंदी का काम एक बार फिर कागजों में ही फंसा हुआ है।
नगर निगम ने 50 लाख रुपये के फंड से 3 हजार कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर निकाला था। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की आचार संहिता की वजह से इस टेंडर को ब्रेक लग गया। खास बात यह है कि यह टेंडर प्रक्रिया चौथी बार चलाई गई है और जानकारी के मुताबिक सिर्फ एक ठेकेदार ने इसमें जवाब दिया है।
शहर की अलग-अलग बस्तियों, बाजारों, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, साथ ही स्कूलों और अस्पतालों के आसपास आवारा कुत्तों के झुंड दिखते हैं। कुत्ते काटने की घटनाएं बढ़ने से नागरिक लगातार नगर निगम से शिकायतें कर रहे हैं। ऐसे में कुत्तों की संख्या काबू में रखने के लिए नसबंदी और टीकाकरण अभियान को रफ्तार देने की जरूरत है।
नगर निगम ने मार्च 2027 तक 3 हजार कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य रखा है और इसके लिए 50 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। टेंडर प्रक्रिया आचार संहिता लगने से पहले पूरी हो चुकी थी। 28 सितंबर को टेंडर खोला जाना था, लेकिन आचार संहिता के कारण वह खुल नहीं सका। शहर में कुत्तों की अनुमानित संख्या और प्रस्तावित नसबंदी का आंकड़ा देखें तो सवाल उठ रहा है कि इस अभियान का असल असर कितना होगा।
पिछले ठेकेदार के जरिए दो हजार से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किए जाने की जानकारी है। लेकिन समझा जाता है कि उस ठेकेदार के 2025 के बिल अब तक बकाया हैं। इसलिए सवाल उठ रहा है कि पुराने ठेके का भुगतान बाकी होते हुए नए ठेके की प्रक्रिया क्यों चलाई गई।
कुत्ता जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत इससे पहले तीन बार टेंडर निकाले गए थे। अब चौथी बार प्रक्रिया चलाई गई, मगर इस बार भी एक ही ठेकेदार ने टेंडर भरा है। उस ठेकेदार के कागजात और पात्रता की जांच के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। इस जानकारी की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एक नजर में: कुत्तों की अनुमानित संख्या 30 हजार से ज्यादा, नसबंदी का नया लक्ष्य 3 हजार कुत्ते, फंड 50 लाख रुपये, टेंडर चौथी बार, जवाब एक ठेकेदार का, काम की मियाद मार्च 2027 तक। मुख्य समस्याएं हैं कुत्तों के काटने की घटनाएं, धीमी नसबंदी और बकाया बिल।
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