पानी की किल्लत से नागपुर की 900 करोड़ की सीमेंट सड़क योजना टल सकती है
नागपुर महानगरपालिका सीमेंट रोड के पांचवें चरण को आगे खिसकाने पर गंभीरता से सोच रही है, क्योंकि जलाशयों में पानी घटा है।
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नागपुर में इस गर्मी में पानी का गंभीर संकट खड़ा होने का डर है और इलाके के जलाशयों में पानी लगातार घट रहा है। इसी वजह से नागपुर महानगरपालिका अपनी महत्वाकांक्षी सीमेंट-कंक्रीट रोड परियोजना के पांचवें चरण को आगे बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करने लगी है।
करीब 900 करोड़ रुपये की इस परियोजना में कंक्रीट मिलाने, उसकी परतें बिछाने और रोज की तराई (क्योरिंग) के लिए लाखों लीटर पानी लगता है। निगम का प्रशासन अभी पीने के पानी की सप्लाई बचाने में जूझ रहा है, ऐसे में शहर इतना पानी खर्च करने की हालत में नहीं है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया है कि काम रोकने का कोई औपचारिक फैसला अभी नहीं हुआ है। लेकिन चर्चा का झुकाव काम टालने की तरफ है।
निगम के सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय ने पुष्टि की कि विभाग हालात की समीक्षा कर रहा है और सीमेंट रोड का पांचवां चरण टल सकता है। कार्यालय के मुताबिक अंतिम फैसला करते वक्त बड़े पैमाने की कंक्रीटिंग के लिए लगने वाले भारी पानी को ध्यान में रखा जाएगा। कार्यालय ने यह भी कहा कि पीने का पानी उपलब्ध रखना प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता है।
नागपुर जिले में इस बार मानसून की बारिश 18 साल में सबसे कम दर्ज हुई। शहर को पानी देने वाले मुख्य जलाशय, जिनमें पेंच और कन्हान के नेटवर्क शामिल हैं, अब 58 प्रतिशत भंडारण के नाजुक स्तर पर हैं।
निगम की टीमों ने पीने के पानी के दुरुपयोग पर 5,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा है। ऐसे में निर्माण कामों के लिए पानी के टैंकर भेजना पानी बचाने के निर्देशों के उलट होगा।
पांचवें चरण में शुरुआत में नगर निगम के नौ जोन की 135 बड़ी डामर सड़कों को कंक्रीट की सड़कों में बदलने की योजना थी। ये सड़कें कुल 89.22 किलोमीटर में फैली हैं। स्थानीय विधायकों और पार्षदों की सिफारिशों के बाद प्रस्ताव बढ़कर करीब 265 सड़कों का हो गया।
सबसे बड़े हिस्से में आशी नगर है, जहां 22 सड़कों पर 16.49 किलोमीटर का काम है। इसके बाद धरमपेठ में 15.36 किलोमीटर और लकड़गंज में 13.33 किलोमीटर है। चौथे चरण की तर्ज पर नक्शे में सड़क किनारे बारिश के पानी की नालियां और भूजल रिचार्ज के गड्ढे भी शामिल हैं।
कई वार्डों में नल पहले ही सूखे पड़े हैं। इसलिए प्रशासन में आम राय यही है कि अगले मानसून में जलाशयों में पानी की आवक सुधरने तक बड़े सड़क कामों को रोककर रखा जाए।
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