दीक्षाभूमी के विकास के लिए 991 करोड़ का प्लान, राज्य सरकार की मंजूरी का इंतजार
नागपुर की दीक्षाभूमि के कायापलट के लिए 991 करोड़ रुपये की विकास योजना प्रस्तावित है और धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के कार्यक्रम में राज्य सरकार से इसे जल्द मंजूरी देने की मांग की गई।
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नागपुर में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की ऐतिहासिक दीक्षाभूमी का कायापलट करने के लिए 991 करोड़ रुपये का विकास नक्शा प्रस्तावित किया गया है। यह प्रोजेक्ट चार चरणों में पूरा करने की योजना है। राज्य सरकार से मांग की गई कि वह इस प्रस्ताव को तुरंत मंजूरी दे। धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के कार्यक्रम में दीक्षाभूमी के विकास के साथ-साथ बौद्ध धम्म के वैश्विक संदेश और बुद्ध के विचारों की आज के दौर में उपयोगिता पर भी जोर दिया गया।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति की ओर से मंगलवार को दीक्षाभूमी पर 70वां धम्मचक्र प्रवर्तन दिन समारोह आयोजित हुआ। इसमें अधिवक्ता शैलेश नारनवरे ने बताया कि दीक्षाभूमी के विकास को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में जनहित याचिका दाखिल की गई है। उन्होंने कहा कि विकास कामों के लिए 991 करोड़ रुपये का नक्शा है और उसे चार चरणों में लागू करने की योजना है। नारनवरे ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने की। म्यांमार के भदंत वन्ना सिरी महाथेरो प्रमुख अतिथि के तौर पर मौजूद थे। फ्रांस की प्राकुंट बुद्धिस्ट अकादमी के अध्यक्ष डॉ. टी. धम्म रतन ने दुनिया के हालात पर बोलते हुए बुद्ध के विचारों की अहमियत बताई। उनके मुताबिक आर्थिक संकटों और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से घिरी दुनिया को शांति, सहअस्तित्व और मानवीय न्याय की राह दिखाने में तथागत गौतम बुद्ध की शिक्षा काम आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बौद्ध धम्म का असर अब एशिया महाद्वीप के बाहर भी बढ़ रहा है।
इसी दौरान दिल्ली के भंते करुणाकरण ने मांग रखी कि महाबोधी विहार बौद्धों के कब्जे में दिया जाए। उन्होंने बौद्ध समाज के लिए अलग व्यक्तिगत कानून की जरूरत भी बताई।
कर्नाटक के जेसे ठाकपा जिंगपा ने कहा कि बुद्ध और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को सिर्फ याद करना काफी नहीं है, उन्हें असल जिंदगी में अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने साफ किया कि बौद्ध धम्म पूरी मानवता की भलाई का रास्ता है।
देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्खू और अनुयायियों ने कार्यक्रम में बुद्ध और डॉ. आंबेडकर को अभिवादन किया। बेंगलुरु के जिग्मे सुल्ट्रीम महाथेरो, सारनाथ के डी. रेवतथेरो, अधिवक्ता आनंद फुलझेले और स्मारक समिति के सचिव सुधीर फुलझेले समेत कई मान्यवर इस मौके पर मौजूद रहे।
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