अमरावती महापालिका का ढाई करोड़ का जल प्लान, अमृत-2 से 50 लाख मंजूर
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अमरावती महापालिका ने बारिश का पानी जमीन में उतारने और सार्वजनिक कुओं को फिर काम का बनाने के लिए ढाई करोड़ रुपये की जलसंवर्धन योजना तैयार की है।
अमरावती जिले पर सूखे का साया गहरा होता जा रहा है। ऐसे में आगे आने वाली पानी की किल्लत से निपटने के लिए अमरावती महापालिका ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। महापालिका ने ढाई करोड़ रुपये की जलसंवर्धन योजना बनाई है। इसका मकसद शहर में बारिश के पानी को बेकार बहने से रोककर जमीन में उतारना, सार्वजनिक कुओं में पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाना और भूजल का स्तर ऊपर लाना है।
इस काम के लिए नामी संस्था आईआईटी रुड़की से तकनीकी मार्गदर्शन लिया जाएगा। केंद्र सरकार की अमृत-2 योजना से 50 लाख रुपये का फंड भी मंजूर हो चुका है। फिलहाल शहर में पानी की सप्लाई कंट्रोल में है, लेकिन आगे किल्लत की नौबत आ सकती है, यह सोचकर महापालिका प्रशासन ने जलसंवर्धन पर जोर दिया है। मौजूदा जलस्रोतों को बचाना, बारिश के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना और भूजल स्तर बढ़ाना, इसके लिए वार्ड के हिसाब से उपाय किए जाएंगे।
महापालिका क्षेत्र में अभी 214 सार्वजनिक कुएं, 4 हजार 60 हैंडपंप और 590 बिजली वाले हैंडपंप हैं। इनमें से हर वार्ड के कम से कम दो सार्वजनिक कुओं की गाद निकालकर उनका पुनर्भरण किया जाएगा। इससे इन कुओं में पानी जमा करने की क्षमता बढ़ेगी और वे दोबारा लोगों के इस्तेमाल लायक बन सकेंगे। इस काम के लिए हर जोन के हिसाब से 10-10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है और टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
संबंधित संस्थाओं को जल्द ही वर्क ऑर्डर दिए जाएंगे। इन कामों के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग से 2 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराया गया है। दूसरी तरफ शहर के 11 खुले मैदानों और बगीचों की खाली जगहों पर वैज्ञानिक तरीके से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा। बरसात में बह जाने वाला पानी इस सिस्टम के जरिए जमीन में उतारा जाएगा, ताकि भूजल का भंडार बढ़े। यह सिस्टम असरदार और तकनीकी तौर पर सही ढंग से बने, इसके लिए आईआईटी रुड़की की मदद ली जाएगी।
महापालिका की कोशिश पानी को रोकने, जमीन में उतारने और मौजूदा जलस्रोतों को फिर से जिंदा करने की तीन बातों पर टिकी है। इसी के सहारे आगे की पानी की किल्लत का खतरा घटाने की योजना है। अगर इन उपायों पर ठीक से अमल हुआ, तो शहर का भूजल स्तर बढ़ सकता है और गर्मी की किल्लत से निपटने में भी मदद मिल सकती है।
बारिश का पानी बहने देने के बजाय जमीन में उतारने, सार्वजनिक कुओं का पुनर्भरण करने और मौजूदा जलस्रोतों को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाने पर महापालिका का खास जोर है। प्रशासन ने इसके जरिए आगे की किल्लत की तीव्रता कम करने का लक्ष्य रखा है। इस बारे में महापालिका के कार्यकारी अभियंता-2 सुहास चव्हाण ने जानकारी दी।
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