अमरावती में घर-घर कचरा उठाव ठप, कोणार्क कंपनी के काम पर सवाल; दरवाजों पर कचरे के ढेर
शहर की सफाई का जिम्मा कोणार्क कंपनी के पास है, लेकिन कई इलाकों में कचरा गाड़ी महीने भर से नहीं पहुंची। लोग परेशान हैं।
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अमरावती शहर की सफाई का जिम्मा जिस कोणार्क कंपनी को सौंपा गया है, उसके काम के तरीके की वजह से लोगों को गंदगी झेलनी पड़ रही है। कई इलाकों से शिकायतें आ रही हैं कि घर-घर कचरा उठाने वाली गाड़ियां महीने भर से फटकी तक नहीं हैं।
गणेशोत्सव के बाद से कचरे की समस्या बढ़ती चली गई है और लोग इससे तंग आ चुके हैं। सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सफाई व्यवस्था पटरी पर क्यों नहीं आ रही।
शहर की नई बसी कॉलोनियों में भी कचरा उठाने का काम गड़बड़ा गया है। लोगों का कहना है कि पहले गाड़ी हर दो दिन में आती थी, पर अब 15 से 20 दिन में एक बार आती है।
सारंग बोलके ने मांग की है कि सफाई का शुल्क वसूलने वाला नगर निगम लोगों के लिए कोई दूसरा इंतजाम करे। गृहिणी रोना घाडगे ने पूछा कि घर में कचरा आखिर कितने दिन जमा करके रखा जाए। जमा हुए कचरे से बदबू फैल रही है और सेहत से जुड़ी दिक्कतों का खतरा भी बढ़ रहा है।
उधर, कोणार्क कंपनी के कर्मचारियों को नियमित वेतन न मिलने का आरोप है। कर्मचारियों की शिकायत है कि वेतन दो महीने तक अटका रहता है और जो पैसा मिलता है वह न्यूनतम वेतन से भी कम है। उनका यह भी कहना है कि भविष्य निर्वाह निधि (पीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की रकम में गड़बड़ी है और वेतन पर्ची भी नहीं दी जाती।
इस बारे में कर्मचारियों ने विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी और श्रम आयुक्त को ज्ञापन दिया है। उन्होंने मांग की है कि कंपनी के रिकॉर्ड की जांच की जाए।
गाड़ियों की कमी भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है। नगर निगम ने कंपनी से 100 से ज्यादा गाड़ियां उपलब्ध कराने को कहा था। बताया जाता है कि पहले के ठेकेदारों से किराये पर ली गई गाड़ियां अदालती प्रक्रिया के बाद लौटा दी गईं, इसलिए उपलब्ध गाड़ियों की संख्या 70 से ज्यादा घट गई। इसका सीधा असर घर-घर कचरा उठाने पर पड़ा है।
कोणार्क कंपनी को पूरी क्षमता से सफाई का काम करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया गया है कि गाड़ियों की कमी से कुछ इलाकों में कचरा उठाना प्रभावित हुआ है और हालात सुधर रहे हैं।