मंगलवार, 3 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

अमित शाह ने कहा, असली संसद में राहुल गांधी की बारी कभी नहीं आएगी

अमित शाह ने कहा, असली संसद में राहुल गांधी की बारी कभी नहीं आएगी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना है तो पूरी जिंदगी मॉक पार्लमेंट में बिता दें। उन्होंने 1984 की सिख विरोधी हिंसा के दिन रैली करने पर भी कांग्रेस की निंदा की।

रविवार को इंडिया आघाड़ी की तरफ से दिल्ली में बड़ा आंदोलन किया गया। इसके बाद सत्ता पक्ष के नेताओं ने राहुल गांधी पर निशाना साधना शुरू कर दिया। इसी कड़ी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी की।

शाह ने कहा कि राहुल गांधी को अगर देश का प्रधानमंत्री बनना है, तो वे पूरी जिंदगी मॉक पार्लमेंट में ही बिता दें, क्योंकि असली संसद में उनके प्रधानमंत्री बनने की बारी कभी नहीं आएगी। शाह ने यह बात मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया आघाड़ी की तरफ से रखी गई मॉक 'महाभियोग कार्यवाही' के संदर्भ में कही।

शाह के मुताबिक राहुल गांधी पिछले 15 साल से चुनावों में लगातार हार का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बेटे को प्रधानमंत्री के रूप में देखने का उनकी मां सोनिया गांधी का सपना अब तक पूरा नहीं हुआ है। एक कार्यक्रम में बोलते हुए शाह ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए, और उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना सिर्फ मॉक पार्लमेंट तक ही सीमित है।

शाह ने 1984 के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में कांग्रेस की रैली 1984 की सिख विरोधी हिंसा के पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है। शाह का कहना था कि 1 नवंबर 1984 को कांग्रेस ने दिल्ली में हजारों बेगुनाह सिखों का कत्लेआम करवाया और उसी दिन राहुल गांधी ने दिल्ली में रैली रखी। शाह ने कत्लेआम के दिन रैली करने के लिए कांग्रेस की निंदा की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की इसी संवेदनहीनता की वजह से उनकी 'मोहब्बत की दुकान' से लोगों को प्यार की जगह नफरत ही मिलेगी।

शाह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने दोषी कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामले दोबारा खोले और उन्हें जेल भेजा। उनके मुताबिक पीड़ित परिवारों को मुआवजा और नौकरियां भी दी गईं।

शाह ने यह आरोप भी लगाया कि सिख संगठनों और भाजपा ने रैली न करने की अपील की थी, फिर भी राहुल गांधी ने रविवार को रैली करने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली के व्यापारियों ने भी दिवाली के बाद रैली करने की गुजारिश की थी, क्योंकि रैली से कारोबार को बड़ा नुकसान होने की आशंका थी। शाह के अनुसार, इसके बावजूद राहुल गांधी को रैली सिख कत्लेआम वाले दिन ही करनी थी।

इस बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पश्चिम दिल्ली में भाजपा के उस मार्च की अगुआई की, जो 1984 की सिख विरोधी हिंसा के विरोध में निकाला गया था। मार्च का मकसद 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' का संदेश देना और दंगा पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता दिखाना था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में पुरी ने 1984 की यादें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि उस वक्त उनके माता-पिता दिल्ली में थे और उनके कुछ हिंदू दोस्तों ने उन्हें अपने घर में पनाह दी थी। पुरी ने इसे इंसानियत और भाईचारे की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि यह कत्लेआम सिर्फ एक समुदाय की त्रासदी नहीं था, बल्कि देश के इतिहास पर लगा ऐसा जख्म था जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। पुरी के मुताबिक इस दर्दनाक इतिहास की सबसे बड़ी सीख यह है कि इंसानियत की रक्षा की जाए, पीड़ितों को इंसाफ दिलाया जाए और राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जाए।

#नागपुर#सियासत#PT24#Politics#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे