मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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गोंदिया में जातिवार जनगणना की मांग को लेकर जयस्तंभ चौक पर हजारों ओबीसी का महामोर्चा

गोंदिया में जातिवार जनगणना की मांग को लेकर जयस्तंभ चौक पर हजारों ओबीसी का महामोर्चा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

गोंदिया के जयस्तंभ चौक पर सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक चले ओबीसी महामोर्चे में आंदोलनकारियों ने जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम मांगा।

गोंदिया शहर के जयस्तंभ चौक पर आज, 1 तारीख को ओबीसी समाज का बड़ा महामोर्चा निकला। "ओबीसी का डाटा नहीं तो हिस्सा भी नहीं" और "अपनी लड़ाई हमें खुद लड़नी होगी", इन नारों और इसी पक्के इरादे के साथ यह मोर्चा बुलाया गया था। सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चले इस आंदोलन में गोंदिया जिले के हजारों ओबीसी भाई, सामाजिक कार्यकर्ता, नौजवान और महिलाएं अपनी मर्जी से शामिल हुए।

मोर्चे में सवाल उठाया गया कि जनगणना में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की तरह ओबीसी के लिए अलग कॉलम क्यों नहीं रखा जा रहा। आंदोलनकारियों ने नाराजगी जताई कि देश में हर तबके की अलग गिनती होती है, फिर बहुसंख्यक ओबीसी की जातिवार जनगणना करने में सरकार टालमटोल क्यों कर रही है। मोर्चे में शामिल लोगों ने जातिवार जनगणना की आवाज बुलंद करते हुए लड़ाई तेज करने की चेतावनी दी।

ओबीसी संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से जातिवार जनगणना की जा रही है, लेकिन इस जनगणना में ओबीसी के साथ अन्याय हुआ है। उनके मुताबिक दूसरे वर्गों की तरह ओबीसी के लिए अलग कॉलम न होने से जनगणना के मकसद पर ही सवाल खड़ा हो गया है। संगठनों ने आरोप लगाया है कि देश में सबसे ज्यादा तादाद वाले ओबीसी के साथ जानबूझकर नाइंसाफी की जा रही है।

मोर्चे में तीखी बातें भी कही गईं। वक्ताओं का सुर था कि देश में जंगल के जानवरों और पक्षियों की अलग गिनती होती है और उनका संरक्षण किया जाता है, मगर इंसान के रूप में जन्मे देश के 50 फीसदी से ज्यादा ओबीसी की गिनती न करना संविधान से मिले हक पर बड़ा अन्याय है। मोर्चे में यह भी कहा गया कि अब तक अपने हक से अनजान रहकर हमने कई पीढ़ियां गुजार दीं, पर अब यह भ्रम टूट चुका है कि कोई मसीहा आकर हमारी लड़ाई लड़ेगा। मोर्चा निकालने वालों ने कहा कि सबको अपना स्वार्थ चिपका हुआ है, इसलिए अब ओबीसी को खुद सड़क पर उतरकर यह लड़ाई जीतनी ही होगी।

महामोर्चे की शुरुआत जयस्तंभ चौक से हुई। "जय ओबीसी" के गगनभेदी नारों से पूरा गोंदिया शहर गूंज उठा। आंदोलनकारियों ने मांग की कि सरकार टालमटोल का रवैया छोड़े और ओबीसी की जातिवार जनगणना कराए।

इस महामोर्चे को कामयाब बनाने के लिए सकल ओबीसी महामोर्चा के संयोजक उमेश कोराम, मनोज मेंढे, सुनील पटले, खेमेंद्र कटरे, कैलाश भेलावे, भूमेश शेंडे, अमर वर्हाडे, पुष्पा खोटेले, एस. यू. वंजारी, पंकज यादव, चंद्रकुमार बहेकार, रवि अंबुले, अजाबराव रिनायत, निखिल बनसोड, प्रकाश काकडे, गुड्डू लिल्हारे, सुनील तरोणे, राजेश नागरीकर, गंगाधर परशुरामकर, वाय. टी. कटरे, ओम पटले, विजय फुंडे, बंटी पंचबुद्धे, मनोज शरणागत, ओम कटरे, रवि पटले, गणेश बरडे, पप्पू पटले, भूमेश टाकरे, संतोष खोब्रागडे, सुरेंद्र सोनवणे, बी. एम. करमकर, सावन कटरे, तीर्थराज उके, रवि भांडारकर, अतुल सतदेवे, परेश दुरुगकर, विनायक येडेवार, कृष्णा ब्राह्मणकर, भोजराज फुंडे, नरेश परिहार, दिलीप गौतम, प्रकाश पटले, किशोर डोंगरवार, संदीप तिडके, खोमेंद्र रहांगडाले, मालती किन्नाके, सुरेंद्र खोब्रागडे और सविता बेदरकर समेत हजारों समाजबंधुओं ने सक्रिय हिस्सा लिया।

"उठ ओबीसी राजा उठ! तुम्हारे उठने की ओर परिवार, समाज और पूरे ओबीसी वर्ग का भविष्य टकटकी लगाए बैठा है", इस आह्वान ने नौजवानों में नया जोश भरा। जयस्तंभ चौक पर जुटी भारी भीड़ ने "जय ओबीसी" के नारे लगाए। यह मोर्चा बेहद शांति से और लोकतांत्रिक तरीके से निकला। इसके जरिए सरकार का ध्यान खींचा गया और जातिवार जनगणना की मांग जोर से रखी गई। सरकार को चेतावनी दी गई कि जब तक जातिवार जनगणना नहीं होती, तब तक बहुसंख्यक ओबीसी चुप नहीं बैठेगा।

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