अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में तीन भारतीय मूल के नेताओं की जीत
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पिया दांडिया, सुहास सुब्रमण्यम और अरुणा मिलर अपने-अपने मुकाबले जीत गए। विवेक रामास्वामी के ओहायो गवर्नर की दौड़ पर सबकी नजर है।
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजे आ रहे हैं और भारतीय मूल के नेताओं ने इनमें दमदार प्रदर्शन किया है। मतदान 3 नवंबर को हुआ था और आज घोषित नतीजों में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों पर जनता ने फिर भरोसा जताया है। इस बार कुल 11 बड़े भारतीय मूल के नेता मैदान में थे, जिनमें से पिया दांडिया, सुहास सुब्रमण्यम और अरुणा मिलर ने अपने-अपने इलाके में शानदार जीत दर्ज की।
डेमोक्रेटिक पार्टी की पिया दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेशनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) का चुनाव जीता। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व मरीन सैनिक केसी आस्कर को हराया। पिया को 51.9 फीसदी वोट मिले। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका गए थे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा काम किया और एक हाईस्कूल की प्रिंसिपल के तौर पर बच्चों की जिंदगी बदलने की कोशिश की।
वर्जीनिया के 10वें डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी के सुहास सुब्रमण्यम फिर चुनकर आए और अपनी सीट बचा ली। वे अमेरिकी कांग्रेस में चुने गए पहले भारतीय-अमेरिकी के तौर पर पहले से जाने जाते हैं। वे पहले पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार भी रह चुके हैं।
मेरीलैंड में लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब क्रोप को हराकर एक और कार्यकाल हासिल किया। डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर की दोबारा जीत का भी अनुमान जताया गया है। हैदराबाद में जन्मीं अरुणा मिलर मेरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर बनने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं।
अमेरिकी राजनीति में मध्यावधि चुनाव की खास अहमियत होती है। इस बार डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों बड़ी पार्टियों ने भारतीय मूल के कई उम्मीदवार उतारे थे। ये नेता सांसद, गवर्नर, लेफ्टिनेंट गवर्नर से लेकर शहरों के मेयर तक के पदों की दौड़ में थे।
मैदान में और भी कई चेहरे थे। सिलिकॉन वैली के 17वें डिस्ट्रिक्ट से रो खन्ना और वॉशिंगटन के 7वें डिस्ट्रिक्ट से प्रमिला जयपाल चुनाव लड़ रही हैं। कैलिफोर्निया के तीसरे डिस्ट्रिक्ट से डॉ. अमी बेरा और एरिजोना के पहले डिस्ट्रिक्ट से डॉ. अमिश शाह उम्मीदवार हैं। टेक्सास में पूजा सेठी और संदीप श्रीवास्तव, लॉस एंजेलिस के मेयर पद के लिए नित्या रमण और न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल पद के लिए सरिता कोमातिरेड्डी किस्मत आजमा रही हैं।
पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा नजर ओहायो के गवर्नर पद की दौड़ में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी पर टिकी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद रामास्वामी के लिए प्रचार किया था। राष्ट्रपति पद की प्राइमरी के बाद ट्रम्प ने उन्हें डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियंसी (DOGE) में नियुक्त किया था, लेकिन ओहायो का गवर्नर बनने की चाह में रामास्वामी ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है।
इन नतीजों से साफ है कि अमेरिकी समाज और नीति बनाने के काम में भारतीय-अमेरिकियों का असर तेजी से बढ़ रहा है। शिक्षा, कानून, मेडिकल और कारोबार में नाम कमाने के बाद अब भारतीय मूल की नई पीढ़ी अमेरिका की मुख्यधारा की राजनीति में अपनी पकड़ बना रही है। आने वाले समय में ये नेता अमेरिका और भारत के आपसी रिश्ते और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे, इसमें शक नहीं।
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