ट्रम्प का एलान: 2026 के बाद अमेरिका इस्रायल को सालाना आर्थिक मदद नहीं देगा
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नेतन्याहू से हुए करार का हवाला देकर कहा कि साल 2026 खत्म होने के बाद इस्रायल को दी जाने वाली सालाना आर्थिक मदद बंद होगी।
अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में बड़े बदलाव के आसार दिख रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एलान किया है कि साल 2026 खत्म होने के बाद अमेरिका इजराइल को हर साल दी जाने वाली आर्थिक मदद बंद कर देगा। ट्रम्प ने इसके लिए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुए करार का हवाला दिया है।
ट्रम्प ने यह बात मध्यावधि चुनाव के दौरान दिए एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने कहा कि इजराइल को अब इस आर्थिक मदद की जरूरत नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि आगे कभी जरूरत पड़ी तो अमेरिका मदद करेगा। इससे पहले भी अमेरिका में इजराइल को दी जाने वाली आर्थिक और फौजी मदद पर एतराज उठाए जा चुके हैं।
ट्रम्प के मुताबिक अमेरिका इजराइल को हर साल करीब 4 अरब डॉलर की मदद देता है। उनका दावा है कि इस मदद को बंद करने पर नेतन्याहू के साथ कुछ महीने पहले ही सहमति बन गई थी। ट्रम्प ने कहा कि दोनों देशों ने इस फैसले को मंजूरी दी है। उनका कहना है कि इजराइल अब आर्थिक तौर पर मजबूत और कामयाब मुल्क बन चुका है, इसलिए उसे अमेरिकी मदद के भरोसे रहने की जरूरत नहीं। इसी वजह से साल के आखिर के बाद मदद रोकने का फैसला लिया गया, ऐसा ट्रम्प ने बताया।
फौजी मदद को लेकर अभी उलझन बनी हुई है। अमेरिका से इजराइल को मिलने वाली मदद में फौजी अनुदान और मिसाइल डिफेंस के लिए रखा गया पैसा अहम हिस्सा है। दोनों देशों के बीच 2016 में हुए सामंजस्य करार के तहत 2019 से 2028 के बीच 38 अरब डॉलर की मदद देने का प्रावधान है। यानी हर साल लगभग 3.8 अरब डॉलर दिए जाते हैं। ट्रम्प ने मदद बंद करने की घोषणा तो कर दी है, मगर मौजूदा करार में बदलाव कैसे होगा, इस पर अब तक कोई तस्वीर साफ नहीं है। अमेरिका से इजराइल को हथियारों की बिक्री जारी रहने की संभावना है।
इजराइल को दी जाने वाली आर्थिक मदद का मुद्दा अमेरिका की अंदरूनी सियासत में भी चर्चा में है। खास तौर पर गाजा युद्ध के बाद अमेरिका के कुछ सियासी गुट इस मदद की आलोचना कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में ट्रम्प की घोषणा को अहम माना जा रहा है।
दूसरी तरफ, नेतन्याहू के दफ्तर की तरफ से इस कथित करार पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में सबकी नजर इस पर है कि ट्रम्प की घोषणा असल में किस शक्ल में लागू होगी और अमेरिका और इजराइल के रिश्तों पर इसका कितना असर पड़ेगा।
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