अल्बानिया में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर प्रदर्शन, तिराना में सुप्रीम कोर्ट के दफ्तर में आग
तिराना में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के दफ्तर में आग लगाई, 167 गिरफ्तार, प्रधानमंत्री एडी रामा का इस्तीफे से इनकार।
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अल्बानिया की राजधानी तिराना में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ चल रहा प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों में आग लगा दी। स्थिति हाथ से निकल गई और इलाके में धुएं के बादल छा गए। मौके पर फायर ब्रिगेड को दौड़ना पड़ा।
स्रोत के मुताबिक, भारत में छात्रों के आंदोलन चल रहे हैं और अब यूरोप भी सुलग उठा है। फ्रांस और इटली के बाद अब अल्बानिया नाम के देश में पांच दिन से छात्र सड़कों पर हैं। यह देश कुदरती खूबसूरती से भरा हुआ है। यहां पहले कम्युनिस्ट विचारधारा के लोगों का राज था। फिर 1991 में जनता ने विचारधारा बदलकर लोकतंत्र चुना और लोकतंत्र के जरिए सरकार चलने लगी। यह देश नाटो का सदस्य है और यूरोपीय संघ का उम्मीदवार भी है।
सिर्फ 28 लाख की आबादी वाले इस देश में पूरी नौजवान पीढ़ी बढ़ते भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से तंग आकर सड़कों पर उतर आई है। जब प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इस्तीफा नहीं देंगे, तो नौजवान और भड़क गए और उन्होंने सीधे सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों को फूंकना शुरू कर दिया। दफ्तर में आग भी लगा दी गई। इस घटना से देश का माहौल काफी गरम हो गया है और सरकार के खिलाफ नाराजगी अब खुलेआम हिंसा के रूप में सड़कों पर दिखने लगी है।
आंदोलन में छात्र और नौजवान बड़ी संख्या में शामिल हैं। वे सरकारी कामकाज में कथित भ्रष्टाचार, यूनिवर्सिटियों में अच्छी सुविधाओं की कमी, महंगी हो चुकी पढ़ाई और पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार के मौके न मिलने से पैदा हुई निराशा को लेकर नाराज हैं।
प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग भी की है। शुरू में यह आंदोलन छात्रों के सवालों पर केंद्रित था, लेकिन अब यह व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन बन गया है। इस सबसे पूरे देश में जबरदस्त तनाव फैल गया है।
तिराना में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को निशाना बनाया। इससे पहले मंत्रालय की इमारत और बैंकों की शाखाओं में भी आग लगाई जा चुकी है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले, पानी की बौछारें और रबर की गोलियों का जमकर इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे।
इस आंदोलन के दौरान 167 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 132 पुलिसवाले भी घायल हुए हैं। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री एडी रामा ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि आंदोलन का हक मंजूर है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान और हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसलिए सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव और तेज होने की आशंका है।