रविवार, 1 नवंबर 2026

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आठवां वेतन आयोग: पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी की मांग, आखिरी सैलरी का 67 फीसदी देने का प्रस्ताव

आठवां वेतन आयोग: पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी की मांग, आखिरी सैलरी का 67 फीसदी देने का प्रस्ताव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनधारक संगठनों ने आठवें वेतन आयोग के सामने पेंशन बढ़ाने की मांग रखी है, फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए आठवां वेतन आयोग इस वक्त बड़ी बात बन गया है। हर 10 साल में केंद्रीय वेतन आयोग बनाने की परंपरा के तहत यह आयोग बना है और अभी अलग-अलग स्तर पर सलाह-मशविरा चल रहा है। देश भर के कर्मचारी संगठन, पेंशनधारक संगठन और दूसरे जुड़े हुए लोगों की मांगें जानने के लिए बैठकें हो रही हैं।

इस आयोग की कमान सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई के हाथ में है, जो अध्यक्ष हैं। पूर्व आईएएस अफसर पंकज जैन सदस्य-सचिव का काम देख रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद से जुड़े अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पुलक घोष आयोग के सदस्य हैं। इन तीनों की अगुवाई में आयोग का काम आगे बढ़ रहा है।

आयोग 3 नवंबर 2025 को बना था। नियम के मुताबिक बनने के 18 महीने के भीतर आयोग को अपनी सिफारिशें देनी होती हैं, यानी आखिरी रिपोर्ट देने की डेडलाइन मई 2027 तक है। इससे पहले फरवरी या अप्रैल 2027 के बीच कोई जरूरी जानकारी या घोषणा आने की संभावना जताई जा रही है। अभी तक आयोग की फाइनल सिफारिशें सामने नहीं आई हैं, इसलिए पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसका कोई पक्का आंकड़ा नहीं बताया जा सकता।

आयोग की सिफारिशों का असर केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनधारकों पर पड़ेगा। इनमें डिफेंस और रेलवे डिपार्टमेंट के कर्मचारी और रिटायर हो चुके लोग भी शामिल हैं।

पेंशन के ढांचे में बड़ा बदलाव करने की मांग कई कर्मचारी और पेंशनधारक संगठनों ने की है। NC-JCM, महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन और AIDEF जैसे संगठनों ने आयोग के सामने अपनी-अपनी मांगें और प्रस्ताव रखे हैं। कम से कम पेंशन बढ़ाने के लिए दो बड़े ऑप्शन पर बात चल रही है। पहले प्रस्ताव में मांग है कि मिनिमम पेंशन आखिरी सैलरी यानी Last Pay Drawn का कम से कम 67 फीसदी हो। दूसरे प्रस्ताव में रिटायरमेंट से पहले के आखिरी 10 महीने की औसत सैलरी के आधार पर मिनिमम पेंशन तय करने की मांग है।

बुजुर्ग पेंशनधारकों के लिए उम्र के हिसाब से पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इस प्रस्तावित ढांचे के मुताबिक 65 साल की उम्र में आखिरी सैलरी का 70 फीसदी, 70 साल के बाद 75 फीसदी, 75 साल के बाद 80 फीसदी, 80 साल के बाद 85 फीसदी और 85 साल के बाद 90 फीसदी पेंशन देने की मांग रखी गई है। 90 साल या उससे ज्यादा उम्र के पेंशनधारकों को आखिरी सैलरी का 100 फीसदी तक पेंशन देने का प्रस्ताव है। मगर यह सिर्फ प्रस्ताव है, इसे केंद्र सरकार की मंजूरी अभी नहीं मिली है।

आयोग के Terms of Reference में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन सुधार को लेकर साफ बात न होने पर चिंता जताई जा रही है, इसलिए संगठनों की मांग है कि इस वर्ग को भी पेंशन सुधार का फायदा मिले।

अभी आयोग सलाह-मशविरा और मांगों की समीक्षा का काम कर रहा है, इसलिए मिनिमम पेंशन, उम्र के हिसाब से पेंशन बढ़ोतरी या आखिरी सैलरी के तय फीसदी के आधार पर पेंशन जैसे प्रस्तावों पर पेंशनधारकों की नजर टिकी है। खास बात यह है कि इनमें से किसी भी प्रस्ताव पर अभी फाइनल फैसला नहीं हुआ है। आयोग की सिफारिशें आने के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होगी, इसलिए पेंशनधारकों को असल में कितनी बढ़ोतरी मिलेगी और कौन से नियम लागू होंगे, यह तस्वीर आखिरी रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी।

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