राज ठाकरे ने सुनाया किस्सा: इंटरव्यू में बाळासाहेब ने दीं गालियां, राऊत ने छाप दिया सब
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संजय राऊत की किताब 'बोध कीर्तन' के विमोचन में राज ठाकरे ने पुराने दिनों की यादें साझा कीं।
शिवसेना ठाकरे गुट के सांसद संजय राऊत की किताब 'बोध कीर्तन' का विमोचन समारोह हाल ही में मुंबई में हुआ। कार्यक्रम में मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे और शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे मौजूद थे। इस मौके पर राज ठाकरे ने संजय राऊत के साथ अपनी पुरानी यादें ताजा कीं।
बोलते हुए राज ठाकरे ने बाळासाहेब ठाकरे के एक पुराने इंटरव्यू का किस्सा सुनाया। उन्होंने संजय राऊत की पत्रकारिता की हिम्मत की तारीफ भी की।
राज ठाकरे ने कहा कि संजय राऊत के साथ उनके संबंध बहुत पुराने हैं। उनके मुताबिक दिलीप ठाकूर और संजय राऊत उनके पिता के पास घंटों बैठा करते थे। राज ठाकरे ने कहा कि दोनों ने उनके पिता की गालियां भी खाई हैं। उन्होंने बताया कि राऊत का पहला वास्ता उनके पिता से पड़ा और उसके बाद बाळासाहेब ठाकरे से।
राज ठाकरे ने बताया कि 1986 से 1988 के बीच वे 'मार्मिक' के लिए कार्टून बनाते थे। उस समय संजय राऊत 'लोकप्रभा' में काम करते थे और गैंगवार पर कहानियां लिखने के लिए जाने जाते थे। इसी दौरान राऊत ने 'लोकप्रभा' के लिए बाळासाहेब ठाकरे का इंटरव्यू लेने की इच्छा जताई और इसके लिए राज ठाकरे से पूछा। राज ठाकरे ने इंटरव्यू में उनकी मदद की।
राज ठाकरे के बताए मुताबिक इंटरव्यू के दौरान राऊत ने बाळासाहेब से कुछ अटपटे सवाल पूछे, जिस पर बाळासाहेब ने उन्हें अच्छी-खासी गालियां दीं। खास बात यह रही कि राऊत ने इंटरव्यू छापते वक्त वे गालियां हटाई नहीं।
राज ठाकरे ने यह किस्सा भी सुनाया कि गालियों समेत इंटरव्यू छपने के बाद बाळासाहेब ने राऊत के बारे में कहा था, 'बंदे में दम है'। राज ठाकरे के मुताबिक आगे 1992 में उन्होंने बाळासाहेब से कहा कि संजय राऊत अच्छा लिखते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उसी साल राऊत 'सामना' के संपादक बने।
अपने भाषण का समापन राज ठाकरे ने चुटकी लेते हुए किया। उन्होंने कहा, 'बोधनकर से शुरू हुआ सफर बोध कीर्तन तक आएगा, ऐसा सोचा नहीं था।'
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