आईटीसी मंगलदीप की नई पहल: अयोध्या मंदिर में नेत्रहीन भक्तों के लिए ब्रेल रास्ता
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"हर भक्त श्री राम तक" डिजिटल उपक्रम में हर भागीदारी से शरयू घाट पर एक दिया जलेगा और मंदिर में स्पर्श वाले ब्रेल रास्ते के लिए योगदान जुड़ेगा।
आईटीसी मंगलदीप (ITC Mangaldeep) ने अयोध्या राम मंदिर से अपना पुराना रिश्ता आगे बढ़ाते हुए "हर भक्त श्री राम तक" नाम का डिजिटल उपक्रम शुरू किया है। इसमें तकनीक और सबकी श्रद्धा को एक साथ जोड़ा गया है, ताकि जिन भक्तों को दिखाई नहीं देता, वे भी आसानी से भक्ति कर सकें।
यह विचार मंगलदीप के सिक्स्थ सेन्स उपक्रम से निकला है। सिक्स्थ सेन्स उन लोगों की मदद करता है जिन्हें दिखाई नहीं देता, ताकि वे आंखों के बिना भी दुनिया को महसूस कर सकें। अब वही सोच भक्ति तक लाई गई है।
मंगलदीप ने यह डिजिटल पहल राम सेतु से प्रेरणा लेकर बनाई है। इसमें कंटूर डिटेक्शन टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल होता है। देशभर के भक्तों से कहा गया है कि वे अपनी-अपनी भाषा में "राम" लिखें।
आपकी हर भागीदारी एक छोटा सा योगदान है। यह योगदान अयोध्या राम मंदिर में स्पर्श से पहचाने जा सकने वाले और ब्रेल वाले रास्ते को बनाने में लगेगा। इससे जिन भक्तों को दिखाई नहीं देता, वे किसी की मदद के बिना दर्शन कर पाएंगे।
यह डिजिटल उपक्रम अयोध्या में जमीन पर भी नजर आएगा। डिजिटल मंच पर हर बार हिस्सा लेने से "हर भक्त श्री राम तक" का बड़ा मकसद आगे बढ़ेगा। यह योगदान स्पर्श वाले और ब्रेल रास्ते के पहले हिस्से में लगाया जाएगा। यह रास्ता इसलिए बन रहा है कि जिन भक्तों को दिखाई नहीं देता, वे मंदिर में आसानी से और खुद चल सकें। साथ ही हर भागीदारी पर शरयू घाट पर एक दिया जलेगा। इस तरह सबकी श्रद्धा मिलकर भक्ति का एक बड़ा उत्सव बनेगी। मंगलदीप चाहता है कि डिजिटल और असल, दोनों तरीकों से जिन भक्तों को दिखाई नहीं देता, वे अयोध्या राम मंदिर में आदर, आजादी और भरोसे के साथ दर्शन करें और दीपोत्सव सबका उत्सव बने।
इस उपक्रम पर आईटीसी के मैचेस एंड अगरबत्ती डिवीजन के डिवीजनल सीईओ रोहित डोगरा ने कहा, "श्रद्धा लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है। उससे अपनेपन का ऐसा एहसास मिलता है, जो इस पर निर्भर नहीं करता कि हम दुनिया को कैसे महसूस करते हैं। मंगलदीप में हम मानते हैं कि इस रिश्ते को और मजबूत करने के अच्छे रास्ते ढूंढते रहना हमारी जिम्मेदारी है।
हमारा सिक्स्थ सेन्स उपक्रम इसी सोच से शुरू हुआ कि जिन्हें दिखाई नहीं देता, वे भी हर अनुभव सबके साथ ले सकें। इसी भरोसे से हमें 'हर भक्त श्री राम तक' उपक्रम का विचार आया। इससे हम एक सीधी लेकिन अहम बात कहना चाहते हैं। भक्ति का अनुभव सबके लिए होना चाहिए। इस डिजिटल उपक्रम से हम पूरे देश को साथ लाकर श्रद्धा का ऐसा पुल बनाना चाहते हैं, जिससे जिन भक्तों को दिखाई नहीं देता, उनके लिए भक्ति आसान हो जाए। हर योगदान से शरयू घाट पर एक दिया जलेगा, जो सबकी भक्ति को दिखाता है।"
यह उपक्रम अयोध्या के दीपोत्सव से मंगलदीप के पुराने रिश्ते को आगे ले जाता है। पहले खुशबू पथ के जरिए भक्ति के अनुभव को और बेहतर किया गया। फिर डिजिटल दीपोत्सव से पूरे देश को जोड़ा गया, जिसमें 1.3 लाख से ज्यादा डिजिटल दियों को असली दियों में बदला गया। अब "हर भक्त श्री राम तक" के साथ मंगलदीप तकनीक और सबके साथ से यह सफर आगे बढ़ाना चाहता है। मकसद है कि भक्ति का ऐसा अनुभव बने जिसमें सब शामिल हो सकें, और देशभर के भक्त एक साथ आएं, ताकि हर भक्त के लिए भक्ति आसान हो।
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