मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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मुंबई में प्रदीप वेलणकर की किताब 'मनापासून' का विमोचन, साथी कलाकारों ने सुनाए अंश

मुंबई में प्रदीप वेलणकर की किताब 'मनापासून' का विमोचन, साथी कलाकारों ने सुनाए अंश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

ज्येष्ठ अभिनेता प्रदीप वेलणकर की किताब 'मनापासून' रविवार 1 नवंबर को मुंबई के मास्टर दीनानाथ मंगेशकर नाट्यगृह में प्रकाशित हुई।

अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले ज्येष्ठ अभिनेता प्रदीप वेलणकर अब कलम के जरिए पाठकों से बात करेंगे। उनकी किताब 'मनापासून' का प्रकाशन समारोह रविवार, 1 नवंबर को मुंबई के मास्टर दीनानाथ मंगेशकर नाट्यगृह में पूरे उत्साह के साथ हुआ। किताब में उनके अनुभवों, यादों और जिंदगी को देखने के नजरिए की झलक मिलती है।

किताब ग्रंथाली की तरफ से प्रकाशित हुई है। उसका कवर अभिनेत्री, निर्देशिका और विज्ञापन क्षेत्र में काम करने वाली मीरा वेलणकर ने अपनी सूझबूझ से तैयार किया है। साहित्य, नाटक और फिल्म जगत के दिग्गजों की मौजूदगी में हुए इस समारोह में वेलणकर के लेखन सफर और उनके लिए लोगों के प्यार की झलक दिखी। सबके प्यार से भावुक हुए वेलणकर ने अपने मन की बात रखी और बताया कि यह पल उनके लिए जितना खुशी का है, उतना ही भावुक करने वाला भी है।

वेलणकर ने कहा, "आज का दिन बोलने का नहीं, महसूस करने का है। आज खुशी है, लेकिन उतना ही मन पर बोझ भी है। लेखक शब्द बहुत बड़ा और ऊंचे दर्जे का है, यह मैं पूरी तरह जानता हूं। उस साहित्यिक ऊंचाई से मैं अभी बहुत दूर हूं, इसका भी मुझे विनम्र एहसास है। बचपन से जो कुछ अनुभव किया, उन अनुभवों को दर्ज करने की ईमानदार कोशिश मैंने 'मनापासून' में की है।"

उन्होंने आगे कहा, "अपनी जिंदगी के अनुभवों को शब्दों में उतारने की मैंने ईमानदार कोशिश की है। मुझे भरोसा है कि आप भी मेरे इन अनुभवों को उतने ही 'मनापासून' अपनापन देकर अपनाएंगे। आपकी तरफ से मिलने वाला यह रिस्पॉन्स मेरे लिए जरूर खुशी और तसल्ली देने वाला होगा।" समारोह में आए मेहमानों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने कहा, "आज यहां मौजूद सब लोग मेरे प्रति प्यार की वजह से आए हैं। आपके इस प्यार की कीमत मेरे लिए सचमुच अनमोल है। मुझे शुभकामनाएं देने और मेरी खुशी में शामिल होने के लिए आप खास तौर पर आए, इसके लिए मैं सबका दिल से आभारी हूं।"

उनकी पत्नी रजनी वेलणकर ने कहा, "हमने अपना घर-संसार पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी से चलाया। जीवनसाथी और सहकलाकार के तौर पर उनका सफर करीब से देखने के बाद, उनकी लिखी यह किताब मुझे खास खुशी देती है। उन्होंने जिंदगी के अनुभवों को शब्द दिए हैं, इसका मुझे गर्व है। यह किताब मैं जरूर पढ़ूंगी और पढ़ने के बाद अपनी राय भी उन्हें जरूर बताऊंगी।"

बेटी गौरी ने पिता के जिंदगी को देखने के नजरिए और उनके समृद्ध जीवन सफर पर गर्व जताया। उन्होंने कहा, "हमारे पिता को जिंदगी में जो कुछ चाहिए था, शायद वह सब नहीं मिला होगा, लेकिन उन्होंने जिंदगी को भरपूर दिया है। उनके इस सफर और उन्होंने जो मूल्य संजोकर रखे, उन पर हमें दिल से गर्व है।"

इस खुशी के मौके पर रजनी वेलणकर के साथ बेटियां गौरी, मीरा और मधुरा भी मौजूद थीं, और नाती-पोते भी आए थे। पूरे परिवार के होने से समारोह में घर जैसा अपनापन और खुशी का माहौल रहा। वहां मौजूद उनके सहकलाकारों ने भी साथ किए काम की यादें ताजा कीं। उन्होंने वेलणकर के मिलनसार स्वभाव, काम के प्रति निष्ठा, साथी कलाकारों से रहे आत्मीय रिश्तों और साथ बीते कुछ खास किस्सों का जिक्र किया। इन यादों से वेलणकर के व्यक्तित्व के कई पहलू सामने आए।

किताब के चुने हुए अंश अभिनेता सुबोध भावे, सुमीत राघवन और उमेश कामत ने भावपूर्ण अंदाज में पढ़कर सुनाए। समारोह ज्येष्ठ अभिनेत्री सुहास जोशी, वंदना गुप्ते, इला भाटे, उज्वला जोग और रजनी वेलणकर के हाथों संपन्न हुआ। अर्चना गोरे, मंदार आपटे और प्राजक्ता रानडे ने अपनी सुरीली आवाज से समारोह में रंग भरा। संचालन डॉ. समीरा गुजर ने किया।

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