गर्मी से फैले पटरे, मध्य रेलवे को परेल, भायखला, दिवा और दिघा में इमरजेंसी ब्लॉक लेना पड़ा
मंगलवार 6 अक्टूबर 2026 को बढ़ते तापमान की वजह से पटरियों के फैलाव को रोकने के लिए मध्य रेलवे ने इमरजेंसी ब्लॉक लिए, जिससे 8 लोकल फेरे प्रभावित हुए।
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मुंबई में बढ़ती गर्मी का सीधा असर अब रेल की पटरियों पर दिखने लगा है, और उसकी मार लाखों लोकल यात्रियों के सफर पर पड़ रही है। तेज और उमस भरे मौसम में पटरियां फैलने लगती हैं। इसे रोकने के लिए मध्य रेलवे प्रशासन को परेल, भायखला, दिवा और दिघा इलाके में इमरजेंसी डिस्ट्रेस ब्लॉक लेना पड़ा। इन ब्लॉक की वजह से मध्य रेलवे की मेन लाइन और ट्रांस हार्बर लाइन की लोकल सेवा गड़बड़ा गई और यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
तापमान बढ़ने पर लोहे की पटरियां फैलती हैं, जिसे थर्मल एक्सपेंशन कहा जाता है। यह खतरा खासकर उन जगहों पर ज्यादा रहता है जहां पटरियों के जॉइंट या कट होते हैं। पटरियों के इस तरह फैलने से गाड़ियों के पटरी से उतरने का बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है।
मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) डॉ. स्वप्निल नीला ने बताया कि पिछले 15 दिनों में इस तरह के कई अस्थायी इंतजाम किए गए हैं और कई ब्लॉक लिए गए हैं। उनके मुताबिक गर्मी से पैदा होने वाली तकनीकी दिक्कतों को टालने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह एहतियात बरतना जरूरी होता है।
मंगलवार 6 अक्टूबर 2026 को दिन भर में मध्य रेलवे के कई संवेदनशील हिस्सों में तापमान बढ़ने की वजह से इमरजेंसी ब्लॉक लिए गए।
भायखला में पटरियों का तापमान बढ़ गया था, इसलिए करीब 30 से 35 मिनट का ब्लॉक लिया गया। यहां अप और डाउन लाइन पर एक के बाद एक ब्लॉक लेकर मरम्मत की गई, ताकि ट्रैफिक पूरी तरह ठप न हो जाए।
परेल स्टेशन पर डाउन स्लो लाइन पर और ट्रांस हार्बर लाइन पर दिघा स्टेशन के पास भी दोपहर में तुरंत मरम्मत का काम हाथ में लिया गया।
इन सभी ब्लॉक और तकनीकी कामों से कुल 8 लोकल फेरे प्रभावित हुए। इनमें से 5 लोकल फेरे 20 से 25 मिनट की देरी से चले, जबकि 3 गाड़ियों का रूट बदलना पड़ा।
यात्रियों की परेशानी इसलिए और बढ़ गई कि रेलवे की तरफ से स्टेशनों पर और चलती लोकल में वक्त पर और ठीक से अनाउंसमेंट नहीं हुए। प्लेटफॉर्म पर पहुंचने के बाद ही लोगों को पता चला कि लोकल देर से चल रही है। ठाणे, मुलुंड, भांडुप, घाटकोपर और कुर्ला स्टेशनों पर नौकरीपेशा लोगों को भारी भीड़ का सामना करना पड़ा। पहले से भरी लोकल गाड़ियां देर से आईं तो सफर में लोगों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी।
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल सेवा मौसम के बदलाव से बार-बार गड़बड़ा रही है। ऐसे में प्रशासन के सामने यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ वक्त की पाबंदी बनाए रखने की भी बड़ी चुनौती खड़ी है।