1 नवंबर से म्यूचुअल फंड ऐप पर सबसे पहले दिखेगा डायरेक्ट प्लान, सेबी का नया नियम
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेबी के चीफ तुहिन कांत पांडे ने बताया कि 1 नवंबर 2026 से म्यूचुअल फंड कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट प्लान डिफॉल्ट विकल्प होगा।
म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वालों के लिए यह खबर काम की है। 1 नवंबर 2026 से म्यूचुअल फंड से जुड़े नियमों में कुछ अहम और बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। सेबी के चीफ तुहिन कांत पांडे ने एक कार्यक्रम में इस बारे में साफ जानकारी दी।
नए इंतजाम के मुताबिक म्यूचुअल फंड कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट प्लान को डिफॉल्ट विकल्प की तरह रखा जाएगा। सीधी बात यह है कि अब आप जब भी ऐप या वेबसाइट पर निवेश करने जाएंगे, तो सबसे पहले आपको डायरेक्ट प्लान ही दिखेंगे।
अगर आप इसके बावजूद रेगुलर प्लान चुनते हैं, तो आपको सीधे बताया जाएगा कि वह प्लान डायरेक्ट प्लान से ज्यादा महंगा है या नहीं। यानी चुनने से पहले दोनों के खर्च का फर्क आपके सामने रहेगा।
अब सवाल उठता है कि डायरेक्ट और रेगुलर प्लान में असल फर्क क्या है। म्यूचुअल फंड में निवेश करते वक्त आप इन दोनों में से कोई एक चुन सकते हैं। डायरेक्ट प्लान में आप सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी के पास निवेश करते हैं। इसमें किसी एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर से वास्ता नहीं पड़ता, इसलिए कोई कमीशन नहीं देना पड़ता और कमीशन का पैसा बच जाता है।
रेगुलर प्लान में निवेश एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए होता है। एजेंट के कमीशन की वजह से इस प्लान का एक्सपेंस रेशो थोड़ा ज्यादा रहता है।
एक्सपेंस रेशो वह रकम या चार्ज है, जो म्यूचुअल फंड कंपनियां आपके पैसों को संभालने और मैनेज करने के लिए वसूलती हैं। इसलिए इसका सीधा असर आपके फंड के रिटर्न पर पड़ता है। डायरेक्ट प्लान चुनने पर निवेश के फैसले आपको खुद लेने होते हैं, जबकि रेगुलर प्लान में आपको एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर की सलाह लेनी पड़ती है।
सेबी ने यह कदम इसलिए उठाया है कि निवेशकों को खर्च की पूरी तस्वीर साफ-साफ मिले और वे सारी जानकारी के साथ सोच-समझकर फैसला कर सकें। अब देखना होगा कि इस बदलाव से निवेशकों को असल में कितना और कैसे फायदा मिलता है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।