सेबी का साठे की ट्रेडिंग अकादमी पर शिकंजा, निवेशकों के 546.17 करोड़ लौटाने का आदेश
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बिना रजिस्ट्रेशन क्लास चलाने और सलाह देने के आरोप में सेबी ने अवधूत साठे, उनकी कंपनी और गौरी साठे पर बड़ी कार्रवाई की है।
पूंजी बाजार की नियामक संस्था सेबी ने अवधूत साठे ट्रेडिंग एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड (ASTPL) और उसके संस्थापक अवधूत साठे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। आरोप है कि ट्रेडिंग के नाम पर हजारों नए लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई और क्लास बिना रजिस्ट्रेशन के चलाए जा रहे थे। सेबी ने निवेशकों और क्लास में शामिल लोगों से जमा किए गए 546.17 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया है।
सेबी की जांच में सामने आया कि कंपनी और उसके संस्थापक जरूरी रजिस्ट्रेशन के बिना निवेश सलाहकार और रिसर्च एनालिस्ट का काम कर रहे थे। जांच के मुताबिक ASTPL और उसके संस्थापक सिर्फ शेयर बाजार की पढ़ाई तक सीमित नहीं थे। वे निवेशकों को खास शेयर खरीदने और बेचने की सलाह भी दे रहे थे। बताया गया है कि जरूरी नियामक रजिस्ट्रेशन न होने के बावजूद कंपनी कथित तौर पर एंट्री और एग्ज़िट लेवल, स्टॉप लॉस और शेयर की कीमत किस तरफ जाएगी, इस बारे में भी सलाह देती थी।
अपने अंतिम आदेश में सेबी ने अवधूत साठे और उनकी कंपनी पर बाजार में पूरी तरह रोक लगा दी है। यह रोक दो साल के लिए है, या पैसे लौटाने के निर्देशों का पालन होने तक, इनमें से जो अवधि ज्यादा हो, उतने समय तक रहेगी। कंपनी के संचालक अवधूत साठे को अलग से छह महीने के लिए बाजार से दूर रहने को कहा गया है।
पैसे जमा करने के लिए भी समय तय किया गया है। आदेश की तारीख से पांच महीने के अंदर कंपनी और अवधूत साठे को पूरी रकम, यानी 546.17 करोड़ रुपये, एक तय किए गए बैंक खाते में जमा करनी होगी। इसके अलावा उन्हें 30 दिन के अंदर अंग्रेज़ी, हिंदी और बड़े पैमाने पर पढ़े जाने वाले स्थानीय भाषा के अखबार में विज्ञापन छपवाने होंगे, ताकि निवेशकों को रिफंड की प्रक्रिया की जानकारी मिल सके।
सेबी ने साफ किया है कि पेमेंट का पूरा रिकॉर्ड रहे और पैसा पाने वालों की पहचान पक्की हो, इसलिए निवेशकों को रिफंड सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर या दूसरे बैंकिंग चैनल से ही दिया जाएगा। सभी दावेदारों को पैसे देने के बाद अगर कुछ रकम बच जाती है, तो वह सेबी को सौंपी जाएगी। यह रकम एक साल तक एस्क्रो खाते में रखी जाएगी, ताकि जो पात्र निवेशक और शिकायतकर्ता रह गए हों, उन्हें उनका पैसा दिया जा सके। इस अवधि के बाद भी अगर कुछ पैसा बचता है, तो उसे निवेशक संरक्षण और शिक्षा निधि, यानी IPEF, में भेज दिया जाएगा।
रिफंड के साथ सेबी ने जुर्माना भी लगाया है। कंपनी, अवधूत साठे और गौरी साठे पर कुल 11.5 करोड़ रुपये का दंड लगा है। इसमें कंपनी पर 6 करोड़ रुपये, अवधूत साठे पर 4 करोड़ रुपये और गौरी साठे पर 1.5 करोड़ रुपये शामिल हैं। सेबी के मुताबिक यह रकम आदेश मिलने के 45 दिन के अंदर जमा करनी होगी।
सेबी ने आदेश में यह भी कहा है कि जब तक पूरी रकम जमा नहीं हो जाती, तब तक संबंधित पक्षों के बैंक खातों में डेबिट लेनदेन रुके रहेंगे।
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