पुणे में 70 साल के बुजुर्ग से 2 करोड़ 10 लाख की ठगी, निवेश का लालच देकर ईडी का डर दिखाया
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे के मुंढवा में अकेले रहने वाले 70 साल के रिटायर्ड बुजुर्ग ने साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दी है। उनका आरोप है कि निवेश के झांसे और मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तारी की धमकी देकर उनसे 2 करोड़ 10 लाख रुपये ठगे गए।
पुणे में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। एक 70 साल के बुजुर्ग का आरोप है कि पहले उन्हें निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया और फिर मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार करवाने की धमकी देकर उनसे कुल 2 करोड़ 10 लाख रुपये की ठगी की गई। इस शिकायत पर पुणे के साइबर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुआ है।
शिकायत करने वाले बुजुर्ग रिटायर्ड हैं और पुणे के मुंढवा इलाके में अकेले रहते हैं। एफआईआर में दी गई जानकारी के मुताबिक यह सब पिछले साल अगस्त से चल रहा था। जब उन्हें समझ आया कि उनके साथ धोखा हुआ है, तब उन्होंने पुलिस का रुख किया।
एफआईआर के मुताबिक बुजुर्ग को सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन दिखा, जिसमें एक निवेश योजना की जानकारी थी। विज्ञापन में जाने-माने उद्योगपति, केंद्रीय मंत्री और खिलाड़ियों की तस्वीरें लगी थीं। इसी में बड़े मुनाफे का लालच भी दिया गया था।
विज्ञापन में दिए नंबर पर फोन करने पर एक व्यक्ति ने बताया कि निवेश करने वाली कंपनी यूके की है। उसने बुजुर्ग से 20 हजार रुपये लगाने को कहा और एक हफ्ते में रकम चार गुना करने का वादा किया। बुजुर्ग ने यूपीआई से 20 हजार रुपये भेजे और एक हफ्ते के भीतर उनके निवेश खाते में 80 हजार रुपये जमा दिखने लगे।
इससे उनका भरोसा जम गया। इसके बाद साइबर ठगों ने उन्हें पहले पांच लाख रुपये और फिर किस्तों में और बड़ी रकमें लगाने के लिए राजी कर लिया। एक बार में उन्होंने 1 करोड़ 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए। उनके निवेश पोर्टफोलियो में 2 करोड़ 80 लाख रुपये की बढ़ोतरी दिखाई दी। इसलिए उन्होंने पैसे निकालने का फैसला किया, लेकिन निकाल नहीं पाए।
इसी बीच 2 जुलाई को उनके पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई का अधिकारी बताया। उसका दावा था कि बुजुर्ग का मोबाइल नंबर किसी अपराध में मिला है और इस बारे में मुंबई क्राइम ब्रांच से फोन आएगा। उसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी से गिरफ्तार करवाने की धमकी दी गई।
ठगों ने कहा कि जांच के लिए पैसे दीजिए, जांच पूरी होने पर रकम लौटा दी जाएगी। इस धमकी से घबराकर बुजुर्ग ने 8 से 15 जुलाई के बीच 1 करोड़ 4 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद सारे आरोपी संपर्क से गायब हो गए। तब बुजुर्ग को पता चला कि वे ठगी का शिकार हुए हैं और वे पुलिस के पास पहुंचे।
आजकल साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट या तरह-तरह के लालच देकर लोगों से ऑनलाइन ठगी की जाती है, और बुजुर्ग और पेंशनधारक खास तौर पर निशाने पर रहते हैं।
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