पुणे क्राइम ब्रांच ने तमिलनाडु के दो कथित चोर पकड़े, आठ मामले सुलझे, 5.5 लाख का माल बरामद
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पीजी में लैपटॉप और मोबाइल चुराने के आरोप में दो लोग गिरफ्तार, यवत के घर से चोरी का सामान मिला।
पुणे सिटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तमिलनाडु के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने शहर के पेइंग गेस्ट (पीजी) ठिकानों से लैपटॉप, महंगे मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान चुराए। इन गिरफ्तारियों से हडपसर, खराडी और चंदननगर पुलिस स्टेशनों में दर्ज चोरी के आठ मामले सुलझ गए हैं। पुलिस ने 5.5 लाख रुपये का चोरी का माल भी बरामद किया है।
यह कार्रवाई क्राइम ब्रांच के रॉबरी एंड व्हीकल थेफ्ट प्रिवेंशन स्क्वॉड 2 ने की। दोनों आरोपियों को 31 अक्टूबर को हडपसर के Gadital इलाके के पास से पकड़ा गया। उनकी पहचान कुमार मरियप्पन (33) और कृष्णा ओलोदन (25) के तौर पर हुई है। दोनों मूल रूप से तमिलनाडु के अंबूर के रहने वाले हैं और पुणे जिले के दौंड तालुका के यवत में रह रहे थे।
सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर अंजुम बागवान ने बताया कि शहर के पीजी में चोरियां बढ़ रही थीं। इनमें खासकर छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स को निशाना बनाया जा रहा था। इसी वजह से दो विशेष टीमें बनाई गईं।
जांच में सबसे पहली कड़ी हडपसर पुलिस स्टेशन में दर्ज चोरी के एक मामले (FIR नंबर 701/2026) से मिली। उस मामले में 2.10 लाख रुपये के लैपटॉप, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी हुए थे। पुलिस ने आसपास के इलाकों की सीसीटीवी फुटेज खंगाली और गोपनीय जानकारी भी जुटाई। इसी के सहारे पुलिस इन दोनों तक पहुंची।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर हडपसर की चोरी कबूल कर ली। आगे की जांच में खराडी और चंदननगर की कई और चोरियां भी उनसे जुड़ती दिखीं। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि चुराया हुआ सामान यवत में अपने घर में छिपाकर रखा है।
पुलिस ने पंच गवाहों की मौजूदगी में उस घर की तलाशी ली। वहां से लैपटॉप, मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक आइटम बरामद हुए, जिनकी कीमत 5.5 लाख रुपये है। इस बरामदगी से कुल आठ मामलों का पता चला। इनमें से एक हडपसर में, पांच खराडी में और दो चंदननगर में दर्ज थे।
बागवान ने बताया कि दोनों कथित चोरी के लिए ही तमिलनाडु से पुणे आते थे। वे पुणे के आसपास के ग्रामीण इलाकों में किराये का कमरा लेकर रहते थे और सुबह-सुबह शहर आ जाते थे। फिर वे छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स वाले पीजी में जाते थे। कमरों के दरवाजे बिना ताले के खुले मिलते तो अंदर घुसकर लैपटॉप और महंगे फोन उठा लेते थे। आरोप है कि सामान जमा करने के बाद वे तमिलनाडु लौट जाते और वहीं उसे बेच देते थे।
यह कार्रवाई पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस संजय दराडे, एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) तेजस्वी सातपुते, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) गौहर हसन और क्राइम ब्रांच 3 के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस शंकर खटके के मार्गदर्शन में हुई।
टीम में सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर अंजुम बागवान, पुलिस सब-इंस्पेक्टर संतोष तनवडे, असिस्टेंट पुलिस सब-इंस्पेक्टर जोतिबा कुराले, पुलिस हेड कॉन्स्टेबल परेश सावंत, महेश बारवकर और रूपाली सूर्यवंशी शामिल थे। इनके साथ पुलिसकर्मी सचिन कांबले, प्रफुल्ल मोरे और विनायक येवले भी थे।
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