चाकणकर पर सोशल मीडिया टिप्पणी मामले में तीन की अंतरिम अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे जिला कोर्ट ने सोमवार को सपना राऊत, मिलिंद गोरे और भूषण पाटिल की अंतरिम अग्रिम जमानत अर्जियां ठुकरा दीं। FIR में 19 लोगों के नाम हैं।
पुणे जिला कोर्ट ने सोमवार को तीन लोगों की अंतरिम अग्रिम जमानत की अर्जियां खारिज कर दीं। इन तीनों के नाम सपना राऊत, मिलिंद गोरे और भूषण पाटिल हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर के खिलाफ सोशल मीडिया पर अश्लील, अपमानजनक और मानहानि करने वाली टिप्पणियां पोस्ट कीं।
यह मामला पुणे सिटी साइबर पुलिस ने रूपाली चाकणकर की शिकायत पर दर्ज किया है। FIR में कुल 19 लोगों के नाम हैं। चाकणकर का आरोप है कि नाशिक के खुद को बाबा कहने वाले अशोक खरात से उन्हें जोड़ते हुए भ्रामक पोस्ट, तस्वीरें और वीडियो ऑनलाइन फैलाए गए और उनके साथ आपत्तिजनक कमेंट भी किए गए।
चाकणकर की वकील जयश्री पालवे-काले ने कोर्ट के फैसले को नैतिक जीत बताया। उनके मुताबिक कोर्ट में बहस महिलाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा पर टिकी रही। पालवे-काले ने कहा, "हमने कोर्ट के सामने अपनी दलीलें मजबूती से रखीं और बताया कि किसी को भी किसी महिला को बदनाम करने या उसके खिलाफ अपमानजनक बातें कहने का हक नहीं है। एक महिला की गरिमा और चरित्र बहुत कीमती होते हैं, और ऐसी टिप्पणियों को सही नहीं ठहराया जा सकता।"
वकील के अनुसार कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लिया और तीनों आवेदकों की अंतरिम अग्रिम जमानत अर्जियां ठुकरा दीं। उन्होंने कहा, "रूपाली चाकणकर ने जो शिकायतें की थीं, उनके मुताबिक उन्हें न्याय मिला है। जो लोग मीडिया के सामने कह रहे थे कि मामला झूठा है, उनके लिए यह झटका भी है। कोर्ट का फैसला रूपाली चाकणकर की नैतिक जीत है।"
पालवे-काले ने मीडिया को यह भी बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट में एक अलग याचिका दाखिल की गई है। उनके मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट जाने की धमकी देने वाले बयान भी कोर्ट के ध्यान में लाए गए।
पुणे सिटी साइबर पुलिस की FIR में जिन लोगों के नाम इन पोस्ट के सिलसिले में आए हैं, उनमें शिवसेना (UBT) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे, NCP (शरद पवार गुट) की नेता रूपाली ठोंबरे-पाटिल और कांग्रेस नेता संगीता तिवारी शामिल हैं। इनके अलावा और लोग भी हैं। सपना राऊत और मिलिंद गोरे का नाम भी कथित तौर पर आपत्तिजनक कमेंट करने को लेकर शिकायत में आया है।
विवाद की शुरुआत मार्च 2026 में हुई। नाशिक पुलिस ने उस महीने अशोक खरात को रेप के एक मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन पर लोगों की नजर गई, और सोशल मीडिया पर चाकणकर के खरात के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने की तस्वीरें और वीडियो घूमने लगे। चाकणकर पहले मान चुकी थीं कि वे खरात को जानती हैं, लेकिन उन्होंने खरात की कथित गलत हरकतों में किसी भी तरह शामिल होने से इनकार किया था।
अगस्त में दी गई शिकायत के मुताबिक चाकणकर करीब नौ साल से खरात को जानती थीं। एक सामाजिक कार्यक्रम में उनकी मुलाकात हुई थी और वे खरात से जुड़े मंदिर के धार्मिक कार्यक्रमों में गई थीं। उनका आरोप है कि मार्च में गिरफ्तारी की खबरें आने के बाद उनकी और खरात की तस्वीरें-वीडियो बेबुनियाद और भ्रामक दावों के साथ फैलाए गए।
चाकणकर का यह भी आरोप है कि कई लोगों ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर उनके बारे में आपत्तिजनक सामग्री डाली। उनके मुताबिक इन पोस्ट पर अश्लील, यौन रूप से आपत्तिजनक, गाली-गलौज वाले और धमकी भरे कमेंट आए, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी हुई और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। अपनी शिकायत के समर्थन में उन्होंने पुलिस को स्क्रीनशॉट और दूसरी सामग्री भी सौंपी।
आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार का आदेश उनमें से तीन की अंतरिम अर्जियों से जुड़ा है। मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और जांच जारी है।
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