रांजणगांव की मेथेनॉल कंपनी ASK केमिकल्स पर FDA की कार्रवाई को मंत्री झिरवाल ने फिलहाल रोका
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FDA मंत्री नरहरि झिरवाल ने ASK केमिकल्स का लाइसेंस रद्द करने के आदेश पर शर्तों के साथ अस्थायी रोक लगाई है। कंपनी का एनसीपी के एक मंत्री से जुड़ाव होने का आरोप है।
पुणे की जहरीली शराब त्रासदी के कुछ महीने बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) मंत्री नरहरि झिरवाल ने रांजणगांव की मेथेनॉल बनाने वाली कंपनी मेसर्स ASK केमिकल्स इंडिया प्रा. लि. के खिलाफ FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे की कार्रवाई पर कथित तौर पर रोक लगा दी है। आरोप है कि यह कंपनी एनसीपी के एक मंत्री से जुड़ी हुई है।
झिरवाल के आदेश की एक कॉपी मौजूद है। यह आदेश 9 सितंबर 2026 को जारी हुआ। इसके तहत कंपनी की अपील को रिकॉर्ड पर लिया गया है और लाइसेंस प्राधिकरण का 17 जून 2026 का आदेश फिलहाल निलंबित रहेगा। उस आदेश में लाइसेंस रद्द किया गया था। कंपनी पुणे जिले के शिरूर तालुका में रांजणगांव के MIDC ग्रुप F-1 में है। उसने महाराष्ट्र FDA, पुणे के संयुक्त आयुक्त (औषधि) और लाइसेंस प्राधिकरण के रद्दीकरण आदेश को चुनौती देते हुए मंत्री के पास अपील की थी।
आदेश के मुताबिक अपीलकर्ता की दलीलें और शुरुआती तथ्य देखने के बाद मंत्री ने अपील मंजूर की और कुछ शर्तों के साथ लाइसेंस रद्द करने पर अस्थायी रोक लगा दी। यह राहत बिना शर्त नहीं है।
आदेश में ये शर्तें रखी गई हैं। पहली, संस्थान में पंजीकृत सक्षम व्यक्ति परिसर से गैरहाजिर नहीं रह सकता। दूसरी, कंपनी को माल के आने और जाने के सभी लेन-देन का सही रिकॉर्ड रखना होगा। तीसरी, उत्पादों की खरीद, भंडारण और बिक्री के स्टॉक रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। चौथी, लाइसेंस प्राधिकरण के 17 जून के आदेश में बताई गई बाकी कमियां कंपनी को मंत्री का आदेश मिलने के 15 दिन के भीतर दूर करनी होंगी। पांचवीं, इसके बाद प्राधिकरण को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी।
मंत्री ने झोन 6 के लाइसेंसिंग ऑफिसर को परिसर का नियमित निरीक्षण करने और सक्षम प्राधिकारी को हर तिमाही निरीक्षण रिपोर्ट भेजने का निर्देश भी दिया है। यानी कंपनी का अनुपालन सिर्फ कागज पर नहीं माना जाएगा, उस पर नजर बनी रहेगी। आदेश में यह भी साफ किया गया है कि तय समय में अनुपालन रिपोर्ट नहीं दी गई तो संबंधित नियम की धारा 8 के तहत अपील का फैसला मेरिट पर किया जा सकता है।
यह मामला 26 से 28 मई 2026 की जहरीली शराब त्रासदी की पृष्ठभूमि में अहम हो जाता है। उसमें पुणे के हडपसर और पिंपरी-चिंचवड के फुगेवाडी-दापोडी इलाके में 22 लोगों की जान गई थी। कई लोगों को कथित तौर पर मेथेनॉल मिली देसी शराब पीने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। मेथेनॉल एक बेहद जहरीला औद्योगिक केमिकल है, जिससे जानलेवा जहर फैल सकता है।
घटना के बाद हडपसर और दापोडी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुए। जांच बाद में राज्य के आपराधिक अन्वेषण विभाग (CID) को सौंपी गई। CID ने कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क का पता लगाया, जो शराब खरीदने, उसमें मिलावट करने और बांटने में लगा था। जांच में शराब की खरीद का सिरा उरुली कांचन के राधेश्याम प्रजापति तक पहुंचा। योगेश रामचंद्र वहानकडे उर्फ सिकंदर राठोड़ पर आरोप है कि उसने शराब में मेथेनॉल मिलाया और फिर उसे पुणे और पिंपरी-चिंचवड में बंटवाया। मेथेनॉल की सप्लाई एक बिचौलिये के जरिए भिवंडी के एक गोदाम तक पहुंची। इस कथित केमिकल सप्लाई चेन के सिलसिले में कंपनी मालिक अरुण चौबे और उनके बेटे अभिषेक चौबे समेत कुछ लोग गिरफ्तार हुए।
CID ने 28 अक्टूबर को विशेष मकोका अदालत में नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बताया गया है कि एक संदिग्ध अब भी फरार है।
मेथेनॉल के दुरुपयोग और डायवर्जन को रोकने की मुहिम के तहत तुकाराम मुंढे ने ASK केमिकल्स के खिलाफ कार्यवाही शुरू की थी। अब इस पर रोक लगने से कुछ सवाल उठ रहे हैं। FDA की कार्रवाई रोकने का आधार क्या था? दखल से पहले आयुक्त की जांच देखी गई थी या नहीं? क्या जनता की सुरक्षा और पुणे त्रासदी से सामने आई बातों पर विचार हुआ? कंपनी को तकनीकी आधार पर राहत मिली है या इसके पीछे कोई और वजह है?
मामले को राजनीतिक रंग इसलिए मिला है कि आरोप लगे हैं कि रांजणगांव की यह कंपनी एनसीपी के एक नेता से जुड़ी है और मंत्री के फैसले पर राजनीतिक दबाव रहा होगा। ये आरोप हैं। जान गंवाने वालों के परिवारों के लिए यह सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं है, उनके लिए सवाल उन हालात की जवाबदेही का है, जिनमें कथित तौर पर एक जहरीला केमिकल अवैध शराब में पहुंचा और जानें चली गईं।
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