पीजी में लैपटॉप-मोबाइल चोरी: तमिलनाडु के दो आरोपी गिरफ्तार, 5.5 लाख का माल बरामद
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पुणे सिटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पीजी से लैपटॉप और मोबाइल चुराने के आरोप में दो लोगों को पकड़ा है। हडपसर, खराडी और चंदननगर के आठ मामले खुल गए हैं।
पुणे, 2 नवंबर 2026: पुणे सिटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दो ऐसे लोगों को पकड़ा है, जिन पर आरोप है कि वे दूसरे राज्य से आकर शहर के पेइंग गेस्ट यानी पीजी वाले ठिकानों से लैपटॉप, महंगे मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान चुराते थे। क्राइम ब्रांच के रॉबरी एवं वाहन चोरी प्रतिबंधक दस्ता 2 ने इनके पकड़े जाने के बाद हडपसर, खराडी और चंदननगर पुलिस स्टेशन में दर्ज चोरी के आठ मामले सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने 5.5 लाख रुपये का चोरी का माल भी बरामद किया है।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अंजुम बागवान के मुताबिक शहर में पीजी में रहने वाले छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स के यहां चोरियां बढ़ गई थीं। इसके बाद पुलिस ने दो विशेष टीमें बनाई थीं।
जांच की शुरुआत हडपसर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक चोरी के मामले से हुई, जिसका एफआईआर नंबर 701/2026 है। इसमें 2.10 लाख रुपये के लैपटॉप, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी हुए थे। पुलिस ने आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और गुप्त जानकारी भी जुटाई।
इसी जांच के आधार पर पुलिस ने 31 अक्टूबर को हडपसर के गाडीतल के पास दो संदिग्धों को पकड़ा। इनकी पहचान कुमार मरियप्पन (33) और कृष्णा ओलोदन (25) के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से तमिलनाडु के अंबूर के रहने वाले हैं और पुणे जिले की दौंड तहसील के यवत में रह रहे थे।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर हडपसर की चोरी में अपना हाथ होना कबूल किया। आगे की जांच में खराडी और चंदननगर की कई चोरियों में भी उनके शामिल होने की बात सामने आई है, जो अभी आरोप के स्तर पर है। आरोपियों ने यह भी बताया कि चोरी का माल उन्होंने यवत में अपने रहने की जगह पर छिपा रखा है।
इस जानकारी पर पुलिस ने पंच गवाहों की मौजूदगी में तलाशी ली और वहां से लैपटॉप, मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए, जिनकी कीमत 5.5 लाख रुपये बताई गई है। इस बरामदगी से कुल आठ चोरी के मामलों का पता चल गया। इनमें से एक मामला हडपसर पुलिस स्टेशन में, पांच खराडी पुलिस स्टेशन में और दो चंदननगर पुलिस स्टेशन में दर्ज थे।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अंजुम बागवान ने आरोपियों के तरीके के बारे में बताया कि दोनों पर आरोप है कि वे खास तौर पर लैपटॉप और मोबाइल चुराने के लिए तमिलनाडु से पुणे आए थे। वे पुणे के आसपास के ग्रामीण इलाकों में किराए के कमरे में रहते थे और सुबह-सुबह शहर में दाखिल होते थे। छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स वाले पीजी उनके निशाने पर रहते थे, और जिन कमरों के दरवाजे खुले मिलते, वहां से लैपटॉप और महंगे मोबाइल उठा लेते थे। बताया गया है कि माल इकट्ठा होने के बाद वे कथित तौर पर तमिलनाडु जाकर उसे बेच देते थे।
यह कार्रवाई पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार, पुलिस संयुक्त आयुक्त संजय दराडे, अपर पुलिस आयुक्त (क्राइम) तेजस्वी सातपुते, पुलिस उपायुक्त (क्राइम) गौहर हसन और क्राइम ब्रांच 3 के सहायक पुलिस आयुक्त शंकर खटके के मार्गदर्शन में हुई।
टीम में पुणे सिटी क्राइम ब्रांच के रॉबरी एवं वाहन चोरी प्रतिबंधक दस्ता 2 के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अंजुम बागवान, पुलिस उपनिरीक्षक संतोष तनवडे, सहायक पुलिस उपनिरीक्षक जोतिबा कुराले, पुलिस हेड कॉन्स्टेबल परेश सावंत, महेश बारवकर और रूपाली सूर्यवंशी, तथा पुलिसकर्मी सचिन कांबले, प्रफुल्ल मोरे और विनायक येवले शामिल थे।
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