मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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कोथरुड के सुतार दरा में पहाड़ी पर खुदाई बंद, PMC ने भेजा नोटिस, पर नोटिस की सच्चाई पर सवाल

कोथरुड के सुतार दरा में पहाड़ी पर खुदाई बंद, PMC ने भेजा नोटिस, पर नोटिस की सच्चाई पर सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

पुणे महानगरपालिका (PMC) ने कोथरुड के सुतार दरा इलाके में पहाड़ी ढलान पर चल रही बिना इजाज़त की खुदाई रुकवा दी है और जमीन मालिकों को नोटिस जारी किया है।

पुणे, 3 नवंबर 2026: कोथरुड के सुतार दरा में पहाड़ी की ढलान पर बिना इजाज़त चल रही खुदाई अब बंद हो गई है। पुणे महानगरपालिका (PMC) ने काम रुकवा दिया और जमीन मालिकों को नोटिस भी भेजा। यहां जमीन को समतल करने का काम भी चल रहा था। पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने खुलकर आलोचना की थी, उसके बाद ही PMC हरकत में आई।

कार्यकर्ताओं का कहना था कि दिन के उजाले में भारी मशीनें चल रही थीं, फिर भी महानगरपालिका ने कुछ नहीं किया। उनका सवाल सीधा था: जब सब कुछ सबके सामने हो रहा था, तो प्रशासन को खबर कैसे नहीं हुई?

खुदाई सर्वे नंबर 113/1 और 113/2 के प्लॉट पर हो रही थी। कागजों में ये प्लॉट हिलटॉप-हिलस्लोप जमीन के तौर पर दर्ज हैं। ढलान को बराबर करने के लिए वहां JCB लगाई गई थी, और उसके बाद जमीन के चारों तरफ बाड़ भी खड़ी कर दी गई। इस पूरे काम के वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गए, और उन्हीं को देखकर लोगों में सवाल उठने लगे।

कार्यकर्ता मामला लेकर वन विभाग के पास भी गए। वन विभाग ने साफ कह दिया कि ये प्लॉट PMC की सीमा में आते हैं, यानी कार्रवाई की जिम्मेदारी महानगरपालिका की ही बनती है।

शहर इंजीनियर अनिरुद्ध पवासकर ने कहा, "मामला हमारे ध्यान में आते ही महानगरपालिका के अधिकारियों ने तुरंत मौके का मुआयना किया। जमीन मालिकों के पास PMC की जरूरी इजाज़त नहीं थी, इसलिए उन्हें काम रोकने का नोटिस दिया गया। अब काम बंद हो चुका है और आगे की जांच चल रही है।"

इस बीच पूर्व सांसद और वकील वंदना चव्हाण ने पूरे मामले की गहराई से जांच मांगी है। इसके लिए उन्होंने महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम और शहर इंजीनियर पवासकर को ज्ञापन दिया। सोमवार को उन्होंने PMC को चेताया कि शहर में कहीं भी खुदाई या पहाड़ियों की कटाई की इजाज़त न दी जाए। चव्हाण का कहना था कि प्रशासन ऐसी गतिविधियां तुरंत बंद करवाए, वरना आंदोलन करना पड़ेगा।

ज्ञापन में चव्हाण ने एक और बात उठाई। सरकार का निर्देश है कि पहाड़ी इलाकों की निगरानी और हिफाजत के लिए हर छह महीने में पहाड़ियों की सैटेलाइट तस्वीरें ली जाएं और उनकी जांच हो। उनका सवाल है कि PMC इस निर्देश पर अमल क्यों नहीं कर रही।

उन्होंने यह भी कहा कि सुतार दरा में सर्वे नंबर 113/1 और 113/2 पर हुई खुदाई के लिए जरूरी अनुमतियां ली गई थीं या नहीं, इसकी जांच हो। साथ ही यह भी देखा जाए कि विकास योजना में इन प्लॉट को किस श्रेणी की जमीन बताया गया है। और अगर कोई मंजूरी मिली थी, तो काम उसकी शर्तों के हिसाब से हुआ या नहीं।

अब खुद नोटिस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग परमिशन विभाग ने नोटिस मिलने की बात मानी और उसकी रसीद भी दिखाई। लेकिन वह कागज PMC के आधिकारिक लेटरहेड पर नहीं था और उस पर कोई सरकारी मुहर भी नहीं लगी थी। वह सादे कागज पर हाथ से लिखा गया था, और उस पर बिल्डिंग डेवलपमेंट विभाग के एक जूनियर इंजीनियर और एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर के दस्तखत थे। ऐसे में कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यह नोटिस कितना पुख्ता है।

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