मुंबई नगर निगम में शिंदे गुट को झटका, विधायक दिलीप लांडे के बेटे प्रणव की नियुक्ति वोटिंग में गिरी
एल वार्ड प्रभाग समिति में 13 में से 9 सदस्यों ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। शिवसेना और भाजपा के भीतर के मतभेद भी खुलकर सामने आ गए।
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मुंबई में शिंदे गुट को बड़ा झटका लगा है। शिंदे गुट के विधायक दिलीप लांडे को खास तौर पर यह झटका लगा है, क्योंकि मुंबई महानगरपालिका के एल वार्ड में गैर-सरकारी सदस्यों के चुनाव में उनके बेटे प्रणव लांडे को हार का सामना करना पड़ा। प्रणव लांडे समेत तीन लोगों की नियुक्ति का प्रस्ताव वोटिंग में गिर गया। यह चयन महानगरपालिका की एल वार्ड समिति के लिए हो रहा था।
मुंबई महानगरपालिका में 26 वार्ड हैं। उनमें से एल वार्ड की वार्ड समिति में समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वाले तीन नामित सदस्यों की नियुक्ति की जानी थी। इस पद के लिए 8 मई को विज्ञापन निकाला गया था। उसके बाद एल वार्ड को 17 आवेदन मिले।
आवेदनों के कागज़ात की जांच हुई तो विधायक दिलीप लांडे के बेटे प्रणव लांडे समेत सिर्फ तीन आवेदक पात्र निकले। जानकारी के मुताबिक 14 आवेदनों में खामियां थीं। इन तीनों की नियुक्ति का प्रस्ताव मंज़ूरी के लिए एल वार्ड की वार्ड समिति की बैठक में रखा गया।
समिति के कुछ सदस्यों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और इसे रद्द करने की मांग की। इसके बाद वार्ड समिति के अध्यक्ष और शिवसेना के विजेंद्र शिंदे ने वोटिंग कराने का फैसला किया। बैठक में 13 सदस्यों में से 9 ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। सिर्फ दो सदस्यों ने इसके पक्ष में वोट दिया और दो सदस्य तटस्थ रहे। नतीजा यह हुआ कि विधायक के बेटे समेत दो लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया रुक गई।
शिवसेना के किरण लांडगे और मीनल तुरडे ने इस चयन प्रक्रिया का विरोध किया। शिवसेना के दो सदस्यों के प्रस्ताव के खिलाफ वोट देने से पार्टी के अंदर के मतभेद खुलकर सामने आ गए। महायुति में शामिल भाजपा के हरीश भांदिर्गे ने भी विरोध का रुख अपनाया, जिससे महायुति के भीतर के मतभेद भी उजागर हो गए। भाजपा के पार्षदों ने भी इस प्रक्रिया का विरोध किया।
इस तरह प्रणव लांडे के साथ दो और लोगों को हार का सामना करना पड़ा और शिंदे गुट को इससे बड़ा धक्का लगा है। एल वार्ड समिति की यह चयन प्रक्रिया अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।
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