सूखे में शिवसैनिक खेतों तक जाएं, अर्जी से सर्वे तक किसानों की मदद करें: शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों से सूखे से जूझ रहे किसानों के पास जाने को कहा।
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राज्य के सूखा प्रभावित किसानों और गांव के लोगों को जल्द मदद मिले, इसके लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के सभी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों से सीधे खेतों में उतरने की अपील की है। उन्होंने यह बात वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई बैठक में कही। शिंदे ने कहा कि किसान जब मदद के लिए अर्जी भरता है, तब से लेकर नुकसान का सर्वे होने और सरकारी मदद उसके हाथ में पहुंचने तक, पार्टी के लोग उसके साथ खड़े रहें।
शिंदे ने बताया कि सूखे को देखते हुए शिवसेना की तरफ से दशहरा मेले के मौके पर 179 सूखा प्रभावित तहसीलों में 4 लाख 60 हजार अनाज किट भेजे गए थे। उनका कहना था कि मदद भेज देना काफी नहीं है। यह पक्का करना होगा कि वह सच में जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे। अनाज किट के साथ रोजमर्रा की जरूरी चीजों का इंतजाम और स्थानीय स्तर पर बंटवारे की जिम्मेदारी भी पदाधिकारी संभालें। पीने के पानी की भारी किल्लत को देखते हुए उन्होंने साफ किया कि पार्टी की तरफ से गांव-गांव टैंकर पहुंचाने पर भी जरूर विचार किया जाएगा।
राजनीति से ज्यादा समाजसेवा को तरजीह देने का संदेश देते हुए शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे की 80 फीसदी समाजसेवा और 20 फीसदी राजनीति वाली सोच याद दिलाई। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने में वक्त गंवाने की बजाय शिवसैनिक सीधे किसानों के पास जाएं और उनकी दिक्कतें दूर कराने के लिए प्रशासन से तालमेल बिठाएं।
निर्देश दिए गए कि हर मंत्री को सौंपे गए सूखा प्रभावित इलाके की जिम्मेदारी लेकर नियमित दौरे करें। सिर्फ बैठकें न करें, बल्कि खेत, गांव, बाजार और पानी की किल्लत वाली जगहों पर जाकर किसानों, महिलाओं, खेत मजदूरों, पशुपालकों और गांव वालों से सीधे बात करें। शिंदे ने पदाधिकारियों से यह भी कहा कि हालात बहुत बुरे हैं, इसलिए कई किसानों के मन में आत्महत्या जैसे अतिवादी ख्याल आ सकते हैं। ऐसे किसानों को वक्त रहते रोकें और उन्हें हिम्मत दें।
मंत्रियों और प्रभारी मंत्रियों से कहा गया कि वे हर 15 दिन में प्रशासन से सूखा प्रभावित तहसीलों की समीक्षा लें। इसमें फसल नुकसान और उसके सर्वे, नुकसान भरपाई, फसल कर्ज का पुनर्गठन, खेती के पंपों की बिजली सप्लाई, पीने का पानी, जानवरों का चारा-पानी, रोजगार और सरकारी योजनाओं का फायदा शामिल है। मकसद यह है कि कोई पात्र किसान सिर्फ कागजात या प्रशासनिक देरी की वजह से मदद से वंचित न रहे। इसके लिए रिकॉर्ड रजिस्टर बनाने और सभी इलाकों में जरूरी मदद पहुंच रही है या नहीं, यह खुद जांचने की भी सलाह दी गई।
पानी को सबसे ऊपर रखकर टैंकर की जरूरत, टैंकर समय पर पहुंच रहा है या नहीं, कुओं और बोरवेल की हालत और अगले 15 से 30 दिन के पानी के इंतजाम की जांच करने को कहा गया। जानवरों के लिए चारा, पानी, पशु शिविरों और पशु चिकित्सा सेवाओं पर भी ध्यान देने की बात कही गई।
सूखे के वक्त भव्य कार्यक्रम, गैरजरूरी स्वागत-सत्कार, शक्ति प्रदर्शन, मंडप, विज्ञापनबाजी और बैनर-होर्डिंग पर खर्च टालकर मौजूद संसाधन मदद में लगाने की अपील भी की गई। शिंदे के मार्गदर्शन का केंद्र यही रहा कि पार्टी, जाति, गांव या राजनीतिक राय देखे बिना हर पात्र लाभार्थी तक मदद पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसान को जिंदा रखना सबसे अहम है और बाकी बातें बाद में आती हैं।
शिंदे ने पार्टी पदाधिकारियों के सुझावों को आने वाली कैबिनेट बैठक में रखकर मंजूरी दिलाने पर सकारात्मक रुख दिखाया। कुछ मांगें केंद्र के स्तर पर सुलझानी हों तो केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखने की तैयारी भी उन्होंने जताई। उन्होंने बताया कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों, बैंकों और निजी साहूकारों की तरफ से किसानों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस फैसला लिया जाएगा और शिवसेना के पदाधिकारी उसके अमल पर नजर रखें। सरकारी मशीनरी के साथ शिवसेना की मशीनरी भी जुटी तो किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, इसलिए सब एकजुट होकर काम में लग जाएं, यह अपील शिंदे ने की।
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