मुंबई के सभी सफाई कर्मचारियों को 2028 तक मिलेंगे सेवा निवास, फडणवीस का ऐलान
कोलाबा में आश्रय योजना के घरों की चाबियां सौंपने के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह घोषणा की।
मुंबई के सफाई कर्मचारियों के लिए दिवाली के वक्त अच्छी खबर आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया कि शहर के सभी सफाई कर्मचारियों को 2028 तक सेवा निवास (BMC Staff Headquarters) उपलब्ध करा दिए जाएंगे। उन्होंने यह घोषणा मुंबई की आश्रय योजना के तहत कुछ कर्मचारियों को घरों की चाबियां सौंपने के कार्यक्रम में की।
नगर निगम की ओर से आश्रय योजना कक्ष, चरण-2 के तहत कोलाबा के राजवाडकर स्ट्रीट, पंचशील नगर में दो इमारतें बनाई गई हैं। यहां सफाई कर्मचारियों के लिए 300 वर्ग फुट के 140 नए सेवा निवास तैयार हैं। इन फ्लैटों में अलग बाथरूम और शौचालय के साथ कई और सुविधाएं दी गई हैं।
फडणवीस ने कहा कि मुंबई नगर निगम ने अच्छा काम किया है। उनके मुताबिक आश्रय योजना के तहत सालों से 150 वर्ग फुट के जर्जर घरों में रहने वाले कर्मचारियों के यहां सामूहिक शौचालय की व्यवस्था थी और कई सुविधाएं नहीं थीं। शहर को साफ रखने वाले नगर निगम के इन भाई-बहनों और कर्मचारियों को अब 300 फुट का घर दिया गया है। इसके लिए उन्होंने मेयर, डिप्टी मेयर और आयुक्त को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक आधुनिक तकनीक से सिर्फ निजी इमारतें बनती थीं, लेकिन इसी तकनीक से इस बार नगर निगम कर्मचारियों के लिए इमारत बनी है। इमारत की उम्र 100 साल है और निर्माण अच्छा है। करीब 30 से 40 प्रतिशत जगह खुली छोड़ी गई है। सामूहिक सुविधाएं दी गई हैं और एक सामूहिक हॉल भी है। दस साल तक मेंटेनेंस डेवलपर करेगा। फडणवीस के मुताबिक कर्मचारी घर में रहने चले जाएं तो दस साल तक उन्हें कुछ देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी सबकी सेहत ठीक रखते हैं और मुंबई को साफ रखते हैं, जिसका फायदा मुंबईकरों को मिलता है। लेकिन उनकी अपनी जिंदगी दड़बे जैसे घरों में कट रही थी। मुंबई जैसा नगर निगम एशिया के संपन्न नगर निगमों में है और उसके कर्मचारी ऐसे हालात में रहें, यह गर्व की बात नहीं है। फडणवीस ने कहा कि आज का नजारा देखकर उन्हें समाधान जरूर मिला और अच्छी जिंदगी देने की शुरुआत हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने राहुल नार्वेकर को भी बधाई दी। उनके मुताबिक ऐसी योजना में अड़चनें आती हैं और उन्हें दूर करने में नार्वेकर ने अहम मदद की, वरना दो-तीन साल और लग जाते।
फडणवीस ने आगे कहा कि लाड-पागे समिति 1973 में बनी थी, लेकिन बाद में अदालत के फैसले से उसका काम बंद हो गया था। फिर वारिस पद्धति शुरू हुई, जिसमें कर्मचारियों के बच्चों को वर्ग तीन में नौकरी मिलती है। दोबारा अड़चनें आईं तो अदालत में लड़ाई लड़ी गई और लाड-पागे समिति लागू की गई। कर्मचारियों के अलग हक बरकरार रखने का फैसला हुआ और कम से कम कितना वेतन मिले, इस पर भी निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि बात यहीं नहीं रुकी, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर श्रमसाफल्य योजना और वाल्मीकि योजना भी शुरू की गई।
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