शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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21:58 IST

येमेन में सरकारी फौज ने हुथी बागियों के खिलाफ छेड़ी सैन्य मुहिम, तनाव बढ़ा

येमेन में सरकारी फौज ने हुथी बागियों के खिलाफ छेड़ी सैन्य मुहिम, तनाव बढ़ा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

येमेन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की फौज ने ईरान-समर्थित हुथी बागियों के खिलाफ सैन्य मुहिम शुरू कर दी है। इसके साथ ही देश में चल रहा संघर्ष और तेज होता दिख रहा है। पिछले कुछ सालों से येमेन गृहयुद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट से जूझ रहा है, और अब वहां के हालात फिर से गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

येमेन में मान्यता प्राप्त सरकार और हुथी बागियों के बीच कई सालों से लड़ाई चल रही है। हुथी गुट ने राजधानी समेत देश के एक बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण कर लिया है। दूसरी तरफ, सरकारी फौज देश में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगी है।

इस पूरे संघर्ष में ईरान की भूमिका अहम मानी जाती है। ईरान पर आरोप लगाया जाता है कि वह हुथी बागियों को समर्थन देता है। इसी वजह से येमेन की लड़ाई में क्षेत्रीय राजनीति का पहलू भी जुड़ गया है।

सरकारी फौज की नई कार्रवाइयों से दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि इस मुहिम का दायरा कितना है, उसमें कितने सैनिक शामिल हैं और जमीन पर इसका असली सैन्य नतीजा क्या रहा, इस बारे में आधिकारिक जानकारी अहम होगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यह संघर्ष ज्यादा वक्त तक चला, तो इसका असर सिर्फ येमेन तक सीमित नहीं रहेगा। पूरे मध्यपूर्व की स्थिरता पर भी इसका असर पड़ सकता है।

लंबे समय से चल रही इस जंग की मार आम नागरिकों पर पड़ रही है। खाने की किल्लत, बेरोजगारी, लोगों का अपना घर छोड़कर जाना और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसी दिक्कतों ने लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। कई परिवारों को सुरक्षित जगह की तलाश में पलायन करना पड़ा है, और बच्चों की पढ़ाई व इलाज भी प्रभावित हुआ है।

अब अगर सैन्य कार्रवाइयां बढ़ती हैं, तो नागरिकों की परेशानियां और गंभीर हो सकती हैं। संघर्ष वाले इलाकों में मदद पहुंचाना, घायलों का इलाज करना और बेघर हुए लोगों को सिर पर छत देना बड़ी चुनौतियां साबित हो सकती हैं। इसीलिए जंग रोकने के लिए कूटनीतिक बातचीत और मानवीय मदद की जरूरत एक बार फिर रेखांकित हो रही है।

येमेन की भौगोलिक स्थिति अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद अहम है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास होने की वजह से यह इलाका एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच समुद्री व्यापार के लिए खास है। यहां सुरक्षा के हालात बिगड़े, तो व्यापारी जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। नतीजतन जहाजों को दूसरे रास्तों से जाना पड़ सकता है और माल ढुलाई का खर्च बढ़ने की संभावना रहती है।

येमेन के संघर्ष की पृष्ठभूमि में ईरान और मध्यपूर्व के दूसरे देशों के बीच का तनाव भी है। इसलिए अगर सैन्य टकराव का दायरा बढ़ता है, तो क्षेत्रीय सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक हालात को काबू में लाने के लिए युद्धविराम, कूटनीतिक संवाद और शांति प्रक्रिया को प्राथमिकता देना जरूरी है।

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