मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

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23:00 IST

येमन में सरकारी फौज के ठिकाने पर हूती मिसाइल हमला, कम से कम 53 सैनिक मरे

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने येमन सरकारी दलों के सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। कम से कम 53 सैनिकों की मौत की जानकारी सामने आई है।

येमन में सरकारी फौज के ठिकाने पर हूती मिसाइल हमला, कम से कम 53 सैनिक मरे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। येमन में हूती विद्रोहियों के एक भीषण हमले से हड़कंप मच गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने येमन सरकारी दलों के एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।

हमले की जानकारी देते हुए कहा गया कि हूतियों ने सरकारी फौज के अड्डे पर अचानक बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। इससे अड्डे को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। सैनिकों को संभलने का मौका मिलने से पहले ही मिसाइलें अड्डे पर आकर गिरीं, इसलिए जानमाल का भारी नुकसान हुआ। कम से कम 53 सैनिकों के मारे जाने की बात बताई जा रही है। हमले के बाद इलाके में डर का माहौल है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर रख रही हैं।

कहा जा रहा है कि हूती अब पहले जैसे नहीं रहे, जो सिर्फ बंदूकों और छोटे रॉकेट लॉन्चर से हमले करते थे। वे तकनीकी तौर पर इतने सक्षम हो गए हैं कि उनकी दागी हुई लगभग सभी मिसाइलें सही निशाने पर जाकर लगती हैं। ठिकाने को ठीक-ठीक पकड़ने की उनकी औसत दुनिया की बड़ी फौजों की क्षमता के बराबर बताई गई है, और यह बात वे वक्त-वक्त पर साबित भी कर चुके हैं।

अमेरिका, इजराइल और सऊदी की सरकार को हूती अपना कट्टर दुश्मन मानते हैं। इसी वजह से वे दिन-ब-दिन अपनी ताकत और क्षमता बढ़ा रहे हैं। हूतियों के इलाके में बड़े पहाड़ और बड़े पठार हैं, इसलिए उनसे लड़ाई सीधी और आसान नहीं है।

संघर्ष क्यों बढ़ा, इस बारे में कहा गया है कि सऊदी और येमन के हूतियों का टकराव बहुत पुराना है। येमन में हूतियों का असर बढ़ना सऊदी अरब को मंजूर नहीं था, इसलिए उसने येमन सरकार को हूतियों से लड़ने में मदद देनी शुरू की। इस पर ईरान ने तुरंत हूतियों की मदद शुरू कर दी। दोनों देशों के दखल से संघर्ष और बढ़ गया। बीच में यह संघर्ष थम गया था।

बताया गया है कि हूतियों के कुछ प्रमुख लोग ईरान के सर्वोच्च नेताओं के अंतिम संस्कार में गए थे। वहां से लौटते वक्त सना एयरपोर्ट पर सऊदी ने उनके विमान पर हमला किया। इस हमले में हूतियों के सारे नेता बच गए, तब हूती गुस्से से भड़क उठे और संघर्ष फिर शुरू हो गया। अब तक की जानकारी के मुताबिक इस संघर्ष में ज्यादा नुकसान येमन सरकार और सऊदी का हुआ है।

हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल होने से येमन के संघर्ष को बड़ा क्षेत्रीय महत्व मिल गया है। मध्य पूर्व में ईरान से जुड़े अलग-अलग हथियारबंद गुटों की हलचल से हालात पहले ही तनावपूर्ण थे, और अब उसमें येमन की हिंसा भी जुड़ गई है। डर जताया जा रहा है कि इस संघर्ष का असर सिर्फ येमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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