यवतमाल में पहली बार तीन बच्चों को गोद लेने के आदेश जारी, मिला अपना परिवार
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महिला व बाल विकास विभाग की दत्तक विधान नियमावली 2022 के तहत यवतमाल जिले में पहली बार तीन गोद आदेश पारित हुए।
यवतमाल जिले में पहली बार तीन बच्चों को गोद लेने के आदेश कामयाबी से पारित किए गए हैं। यह कार्रवाई महिला व बाल विकास विभाग की ओर से चलाई जा रही दत्तक विधान नियमावली 2022 के तहत हुई। इन आदेशों के बाद तीन बच्चों को प्यार, ममता, सुरक्षा और अपना परिवार मिला है। गोद लेने वाले माता-पिता का कई सालों पुराना अभिभावक बनने का सपना भी पूरा हुआ है।
जिले में एक साथ तीन गोद आदेश पारित होने से प्रशासन की उस कोशिश को ताकत मिली है, जिसके तहत जिले में गोद लेने की प्रक्रिया को असरदार ढंग से चलाया जा रहा है। जिला बाल संरक्षण कक्ष के जरिए बच्चों के हक की रक्षा करने, उनके सबसे अच्छे हित को सुरक्षित रखने और उन्हें महफूज पारिवारिक माहौल देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
बताया गया कि गोद लेना सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यह एक संवेदनशील सामाजिक प्रक्रिया है, जो बच्चों को प्यार करने वाला परिवार, सुरक्षित माहौल और बेहतर भविष्य देती है। जिले के इन तीनों मामलों में बच्चों के सबसे अच्छे हित को सबसे ऊपर रखा गया।
इसके लिए जरूरी कानूनी प्रावधानों की पूर्ति की गई, कागजात की जांच हुई और अलग-अलग स्तरों की प्रक्रिया पूरी की गई। इस तरह पूरी गोद प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से और नियमों के मुताबिक निपटाई गई।
जिलाधिकारी विकास मीना ने संबंधित गोद आदेश पारित कर इस संवेदनशील प्रक्रिया को आखिरी मंजूरी दी। उनके मार्गदर्शन में जिले की बाल न्याय व्यवस्था और जिला बाल संरक्षण कक्ष ने अहम भूमिका निभाई।
जिलाधिकारी विकास मीना ने पात्र और इच्छुक दंपतियों से अपील की है कि बच्चा गोद लेते समय किसी गैर-अधिकृत व्यक्ति या बिचौलिए का सहारा न लें। वे सिर्फ अधिकृत और कानूनी गोद प्रक्रिया का ही रास्ता अपनाएं।
ज्यादा जानकारी के लिए महिला व बाल विकास विभाग की ओर से अपील की गई है कि लोग जिला बाल संरक्षण कक्ष से संपर्क करें। यह कक्ष यवतमाल में जिलाधिकारी कार्यालय की प्रशासनिक इमारत की दूसरी मंजिल पर है।
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