बैतूल की प्रखरश्री जज की परीक्षा पास करके भी लेंगी जैन दीक्षा, शहर में निकली रैली
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मध्य प्रदेश के बैतूल में रविवार 1 नवंबर को पांच दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में रैली निकली। इनमें एलएलएम गोल्ड मेडलिस्ट प्रखरश्री दीदी भी हैं, जिन्होंने 2023 में सिविल जज की परीक्षा पास की थी।
मध्य प्रदेश के बैतूल शहर में रविवार, 1 नवंबर को एक अलग ही नजारा दिखा। जैन दीक्षा लेने जा रहीं पांच बहनों के सम्मान में शहर में बड़ी रैली निकाली गई। आस्था, भक्ति और वैराग्य का ऐसा मेल लोगों ने शहर में पहले कम ही देखा था।
इन पांच बहनों में बैतूल की बेटी प्रखरश्री दीदी भी शामिल हैं। उन्हें नगर गौरव और ब्रह्मचारिणी के तौर पर जाना जाता है। उनकी कहानी इसलिए सबका ध्यान खींच रही है कि उन्होंने जज बनने की राह पर कदम बढ़ाकर भी संन्यास का रास्ता चुना है।
प्रखरश्री दीदी ने एलएलएम में गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से ऊंची पढ़ाई भी की है। साल 2023 में उन्होंने सिविल जज की बेहद मुश्किल परीक्षा भी पास कर ली थी।
बताया गया है कि माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने जज की परीक्षा दी और पास की। लेकिन बचपन से ही उनके मन में वैराग्य के बीज पड़ चुके थे। उन्हें पक्का भरोसा है कि वकील या जज बनकर जितनी सेवा हो सकती थी, उससे कई गुना ज्यादा सेवा भगवान महावीर की अहिंसा और संयम के रास्ते पर चलकर हो सकती है। इसी यकीन के साथ उन्होंने सांसारिक सुख छोड़ने का फैसला किया।
यह कार्यक्रम बैतूल सकल जैन समाज के सहयोग से हुआ। रैली में राजस्थान के उदयपुर से आया मशहूर बैंड, सजी हुई शाही बग्घी और विंटेज कारें लोगों की नजर का केंद्र रहीं। बैंड-बाजे के साथ निकली इस शोभायात्रा में दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और पूरा शहर इस मौके का गवाह बना।
रैली जैन दादावाड़ी पहुंची तो पांचों दीक्षार्थी बहनों की परंपरा के मुताबिक गोदभराई की रस्म हुई। प्रखरश्री दीदी के साथ रंगोली दीदी और बाकी तीन बहनें भी 22 नवंबर को दीक्षा लेंगी। अभी तक ये बेटियां रंगीन कपड़े पहनती थीं, लेकिन दीक्षा के बाद वे संयम की पहचान माने जाने वाले सफेद कपड़े धारण करेंगी।
भौतिक सुखों को छोड़कर परमार्थ के रास्ते पर निकलीं इन बेटियों के फैसले की इन दिनों देशभर में खूब चर्चा हो रही है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।