नरखेड़ के लोहारी सावंगा में 1948 से ग्राम पंचायत, मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से चर्चा
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर जिले के नरखेड़ तहसील का लोहारी सावंगा गांव मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रस्तावित दौरे के कारण चर्चा में है। गांव की पंचायत 1948 में बनी थी और खेती यहां की रोज़ी का मुख्य सहारा है।
नागपुर जिले के नरखेड़ तहसील में बसे लोहारी सावंगा गांव को ग्राम विकास की पुरानी विरासत मिली है। यहां की ग्राम पंचायत 1948 में बनी थी। इसके बाद के दशकों में गांव ने सामाजिक, आर्थिक और खेती के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए गांव के विकास के सफर पर फिर बात होने लगी है। खेती यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है, फलों के बागों की पुरानी परंपरा है और गांव का जीवन अब भी ग्रामीण ढंग का है। गांव की आबादी, पंचायत के ढांचे और खेती की अर्थव्यवस्था को देखें तो ग्रामीण महाराष्ट्र की तस्वीर लोहारी सावंगा में साफ दिखती है।
स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दौर में बनी इस ग्राम पंचायत ने गांव के स्थानीय प्रशासन की नींव मजबूत की। अभी पंचायत में कुल 12 सदस्य हैं, जिनमें सात महिलाएं और पांच पुरुष हैं। गांव का प्रशासनिक ढांचा चार वार्डों में बंटा हुआ है। करीब आठ दशक का पंचायत कामकाज और स्थानीय स्वराज संस्था की परंपरा गांव के विकास के सफर की अहम खासियत मानी गई है।
2011 की जनगणना के मुताबिक गांव की आबादी 4 हजार 264 थी। इसमें 2 हजार 414 पुरुष और 1 हजार 850 महिलाएं शामिल हैं। गांव में कुल 844 परिवार हैं। इनमें से 590 परिवार एपीएल और 254 परिवार बीपीएल श्रेणी में आते हैं।
गांव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर टिकी है। यहां के किसान कपास, अरहर, संतरा, मोसंबी, सोयाबीन, चना और गेहूं जैसी कई फसलें उगाते हैं। पारंपरिक फसलों के साथ फलों के बागों से भी किसानों को कमाई के विकल्प मिले हैं। नरखेड़ तहसील संतरे की पैदावार के लिए जाना जाता है, इसलिए इस इलाके के बागों का आर्थिक महत्व काफी है।
फिर भी किसानों के सामने चुनौतियां हैं। आधुनिक खेती के तरीके, सिंचाई की सुविधा, उत्पादन की लागत, बाज़ार के भाव और प्राकृतिक आपदाएं इनमें गिनी गई हैं। गांव का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 979.19 हेक्टेयर आर है। खेती के साथ आधुनिक तकनीक जुड़े, कृषि उपज की प्रोसेसिंग के उद्योग लगें और सही बाज़ार मिले, तो गांव की अर्थव्यवस्था को और ताकत मिल सकती है।
बुनियादी सुविधाओं में पानी की आपूर्ति अहम है। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक लोहारी सावंगा में नल कनेक्शन वाले कुल 810 खाताधारक हैं। 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गांव में मतदाताओं की संख्या 2 हजार 400 है। गांव का विकास सिर्फ सड़क और पानी तक सीमित नहीं है। वह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और खेती की सुविधाओं से भी जुड़ा है।
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे के चलते इन सवालों की अहमियत बढ़ गई है। किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, सिंचाई की सुविधा, उपज का सही भाव और प्रोसेसिंग उद्योगों की उपलब्धता मिले, यह उम्मीद की जा रही है। इस दौरे में गांव के विकास से जुड़े किन मुद्दों को प्राथमिकता मिलती है, इस पर ग्रामीणों की नज़र है।
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