शिरपूर जैन में हफ्ते में दो बार नल का पानी छोड़ने की मांग, ग्रामपंचायत को निवेदन
तंटामुक्त समिति अध्यक्ष नंदकिशोर उल्हामाले ने ग्रामपंचायत प्रशासक को निवेदन दिया है कि अडोळ परियोजना से हफ्ते में कम से कम दो बार पानी मिले।
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शिरपूर जैन गांव में पानी को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। अडोळ परियोजना से गांव को जो पानी मिलता है, वह अभी काफी बड़े अंतराल पर आता है। इसी को देखते हुए गांव की तंटामुक्त समिति के अध्यक्ष इंजि. नंदकिशोर उल्हामाले ने रविवार को स्थानीय ग्रामपंचायत के प्रशासक और ग्रामविकास अधिकारी को एक निवेदन सौंपा।
निवेदन में कहा गया है कि आगे सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। इसलिए कम से कम हफ्ते में दो बार शिरपूर में नल का पानी छोड़ा जाए और उसी हिसाब से नियोजन किया जाए।
निवेदन में हालात भी गिनाए गए हैं। इस साल बारिश कम हुई, इसलिए गांव के कुएं और बोरवेल जल्दी सूखने की स्थिति में हैं। दूसरी तरफ बोराळा की अडोळ परियोजना करीब 50 प्रतिशत भरी हुई है। फिर भी पिछले साल का तजुर्बा यह रहा कि नल योजना से शिरपूर को ठीक से पानी नहीं मिल पाया।
इसलिए मांग यह है कि इस साल गांव को सुचारू पानी देने के लिए जो भी इंतजाम करने हैं, वे अभी के वक्त में ही कर लिए जाएं, ताकि आगे दिक्कत न आए। यह निवेदन शिरपूर ग्रामपंचायत को दिया गया है और अब गांव वालों की नजर इस पर है कि ग्रामपंचायत क्या कदम उठाती है।
आगे की पानी की किल्लत से बचने के लिए निवेदन में कुछ ठोस काम सुझाए गए हैं। ज्यादा हॉर्स पावर की मोटर लगाई जाए, नल योजना की मुख्य पाइप पर जो अवैध कनेक्शन हैं उन्हें बंद किया जाए, और लीकेज ढूंढकर बंद किए जाएं। साथ ही ज्यादा हॉर्स पावर की एक मोटर पहले से मंगवाकर रखी जाए। इससे गांव को हफ्ते में दो बार पानी दिया जा सकेगा और अतिरिक्त परेशानी नहीं होगी।
निवेदन में चेतावनी भी दी गई है। अगर ग्रामपंचायत मार्च 2027 से गांव को हफ्ते में दो बार पानी नहीं दे पाई, तो मजबूरी में आंदोलन करना पड़ेगा, और उसकी पूरी जिम्मेदारी ग्रामपंचायत की होगी।
गांव वालों का भी कहना है कि पानी के सवाल पर ग्रामपंचायत को फौरन ठोस प्लानिंग करनी चाहिए। अडोळ परियोजना में पानी का स्टॉक मौजूद है। अगर पानी बांटने के इंतजाम की अड़चनें दूर कर दी जाएं, तो शिरपूर को नियमित पानी मिल सकता है। इसलिए मोटर की क्षमता बढ़ाने, पाइपलाइन की लीकेज ठीक करने और अवैध जोड़ बंद करने का काम जल्द से जल्द शुरू करने की मांग गांव वाले कर रहे हैं।