वरोरा में महिला से बलात्कार के मामले में दोषी को उम्रकैद की सज़ा
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वरोरा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 2021 के मामले में दोषी को उम्रकैद और जुर्माने की सज़ा सुनाई।
चंद्रपुर जिले के वरोरा में एक महिला पर यौन अत्याचार के मामले में अदालत ने फैसला सुना दिया है। वरोरा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सज़ा दी है। सज़ा के साथ जुर्माना भी लगाया गया है। मामला 2021 में वरोरा पुलिस स्टेशन की हद में हुआ था।
यह मुकदमा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अतुल के. शहा की अदालत में चला। सरकारी पक्ष की तरफ से सरकारी वकील एड. गोविंद उराडे ने पैरवी की। अदालत ने 29 अक्टूबर 2026 को अपना अंतिम फैसला सुनाया। उराडे की ओर से रखे गए गवाह, सबूत और दलीलों को अदालत ने मानते हुए यह फैसला दिया।
पुलिस के मुताबिक घटना 29 अप्रैल 2021 की शाम करीब 7:15 से 8:00 बजे के बीच की है। शिकायत करने वाली महिला उस वक्त आरोपी के साथ फोर व्हीलर गाड़ी से अपने गांव जा रही थी। खैरी से महिला के गांव की तरफ जाने के बजाय आरोपी ने गाड़ी माढेळी वाले रास्ते पर मोड़ ली। नागरी माढेळी से दो से तीन किलोमीटर दूर ले जाकर उसने महिला को जान से मारने की धमकी दी, मारपीट की और उसके साथ यौन अत्याचार किया।
महिला की शिकायत पर वरोरा पुलिस स्टेशन में तुरंत केस दर्ज किया गया। यह अपराध रजिस्टर नंबर 353/2021 के तहत भारतीय दंड विधान की धारा 376, 376(2)(एन)(इ), 323 और 506 में दर्ज हुआ। आरोपी को उसी वक्त गिरफ्तार कर लिया गया था।
वरोरा पुलिस ने मामले की जांच गहराई से की। जांच अफसरों ने मौके के चश्मदीद गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और बाकी अहम परिस्थितिजन्य सबूत जमा किए। इसके बाद पुलिस ने समय पर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
अदालत ने धारा 376(2)(एन) के तहत आरोपी को उम्रकैद और 5,000 रुपये जुर्माने की सज़ा दी है। जुर्माना न भरने पर उसे तीन महीने की साधारण कैद काटनी होगी। धारा 376 में सात साल की सज़ा और 4,000 रुपये जुर्माना लगा है। धारा 323 में एक साल की सज़ा और 1,000 रुपये जुर्माना है। धारा 506 में भी एक साल की सज़ा और 1,000 रुपये का जुर्माना सुनाया गया है।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी, अपर पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे और वरोरा के उप विभागीय पुलिस अधिकारी के मार्गदर्शन में हुई। मामले की जांच वरोरा पुलिस स्टेशन की महिला सहायक पुलिस निरीक्षक विद्या जाधव ने की। अदालत में कोर्ट पैरवी अधिकारी के तौर पर वरोरा पुलिस स्टेशन के सहायक उप निरीक्षक धनराज करकाडे ने काम देखा। चंद्रपुर के दोषसिद्धि कक्ष की भी इस मामले में अहम भूमिका रही।
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