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23:33 IST

जय भारत नाके पर हटे अवरोध, पनवेल को जाम से राहत, कमिश्नर मंगेश चितळे की कार्रवाई

पनवेल महानगरपालिका के कमिश्नर मंगेश चितळे ने जय भारत नाके पर सड़क में रुकावट बने निर्माण हटवाए, इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली।

जय भारत नाके पर हटे अवरोध, पनवेल को जाम से राहत, कमिश्नर मंगेश चितळे की कार्रवाई तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पनवेल के जय भारत नाके पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से लोगों को राहत मिली है। पनवेल महानगरपालिका के कमिश्नर मंगेश चितले ने सख्त रुख अपनाया और सड़क में रुकावट बन रहे निर्माण को हटवा दिया। इसके बाद जय भारत नाका इलाके के लोगों ने चैन की सांस ली है।

इस नाके का नाम देशभक्ति की भावना से जुड़ा है। आज़ादी के आंदोलन के दौर में और आज़ादी के बाद देश में कई चौकों और नाकों के नाम इसी प्रेरणा से रखे गए। 'जयभारत' नाम उसी राष्ट्रीय भावना की निशानी है। आज़ादी के आंदोलन के वक्त यह जगह स्थानीय कार्यकर्ताओं की बैठकों और आंदोलनों का मुख्य ठिकाना थी। लेकिन पनवेल शहर का दायरा बढ़ता गया और जय भारत नाके पर जाम बहुत ज़्यादा होने लगा।

जाम की वजह भी साफ है। पनवेल में बाहर से आने-जाने वालों की तादाद बड़ी है, और शहर के अंदर भी अच्छी-खासी आबादी रहती है। इसलिए सड़कों पर भीड़ रहती है और गाड़ियां भी कम नहीं हैं। सबसे अहम बात यह है कि पनवेल की ज़्यादातर सोसायटियों में पार्किंग की व्यवस्था ही नहीं है। इमारतों में रहने वाले लोग अपनी गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी कर देते हैं, जिसका जाम पर बड़ा असर पड़ता है। इसी वजह से कमिश्नर मंगेश चितले ने सड़कें चौड़ी करने की मुहिम हाथ में ली है।

जय भारत नाके के आसपास पुरानी पेठ, कापड बाजार और अहम मंदिर हैं। पुराने पनवेल का यह मध्यवर्ती ठिकाना त्योहारों, राजनीतिक सभाओं और सामाजिक आंदोलनों का केंद्र हमेशा से रहा है।

पालिका ने शहर की ज़्यादातर सड़कें 20 से 30 फुट की की हुई हैं। इनमें लाइन आली, झवेरी बाजार, वी. के. हाई स्कूल रोड, महात्मा फुले रोड और तिलक रोड शामिल हैं। महानगरपालिका बनने के बाद ये सड़कें कम पड़ रही हैं और इन्हें चौड़ा करने की ज़रूरत महसूस हो रही है। बाज़ार में कुछ रास्ते तो आज भी 15 से 20 फुट के भी नहीं हैं। कापड गली और मिर्ची गली इसी में आती हैं।

पनवेल महानगरपालिका ने इस सड़क को चौड़ा करने के लिए यहां के घरमालकों को बढ़े हुए एफएसआई का प्रस्ताव दिया था। मगर किराएदारों की अनुचित मांगों की वजह से मालिकों और किराएदारों के बीच विवाद खड़ा हो गया, और यह प्रस्ताव अटका रहा। उधर टपाल नाके पर जाम दिन-ब-दिन बढ़ रहा था, इसलिए यहां सड़क चौड़ी करना ज़रूरी था।

कुछ महीने पहले इस काम में रुकावट बन रहे छह दुकानों पर पालिका की तरफ से जेसीबी की मदद से बड़ी तोड़ने की कार्रवाई की गई थी। इसके अलावा यहां की 80-90 साल पुरानी, खतरनाक एक मंज़िला लकड़ी की इमारत को भी अतिक्रमण विभाग ने जेसीबी से गिरा दिया। इन कार्रवाइयों से टपाल नाके का जाम तोड़ने में पालिका प्रशासन को कामयाबी मिली है।

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