सीईटी 2027: दिसंबर वाली परीक्षा रद्द, अब दोनों सीईटी बारहवीं के बाद ही होंगी
उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग ने दिसंबर की सीईटी नहीं लेने का फैसला किया है। इंजीनियरिंग और फार्मेसी की सीईटी साल में दो बार ही होगी।
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सीईटी देने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने अपना फैसला बदल दिया है। इंजीनियरिंग और फार्मेसी में दाखिले के लिए होने वाली सीईटी साल में दो बार ही होगी, यह बात कायम रखी गई है। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि दिसंबर का पेपर नहीं लिया जाएगा।
उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक परीक्षा दो बार होने का फैसला जस का तस है। ये दोनों परीक्षाएं बारहवीं के बाद होती हैं। सीईटी सेल ने भी इस बात का समर्थन किया है।
पहले क्या प्लान था, यह भी समझ लीजिए। 2026-27 से सरकार ने सीईटी दो बार लेना शुरू किया। इसका फायदा यह है कि बच्चों को परीक्षा देने के दो मौके मिलते हैं। दोनों पेपर में से जिसमें ज्यादा मार्क आएंगे, वही मार्क दाखिले की प्रक्रिया में गिने जाएंगे। पहले साल यह फैसला थोड़ा देर से हुआ था, इसलिए दोनों पेपर अप्रैल और मई में लेने पड़े।
अगले साल यानी 2027-28 के लिए अलग सोच चल रही थी। सीईटी सेल ने तय किया था कि पहली सीईटी दिसंबर 2026 में और दूसरी अप्रैल 2027 में ली जाए। वजह यह थी कि जेईई भी इसी तरह दो सेशन में होती है, इसलिए सीईटी भी दो सेशन में कराने का विचार था।
दिसंबर वाले पेपर का गांव-देहात से जोरदार विरोध हुआ। धाराशिव, नंदुरबार और चंद्रपुर के अभिभावकों और क्लास चलाने वाले शिक्षकों ने सरकार को चिट्ठी लिखी। उनका कहना था कि यह फैसला मुंबई और पुणे के बड़े क्लासेस को ध्यान में रखकर लिया गया है।
गांव की तरफ जेईई देने वाले बच्चों की गिनती बहुत कम होती है। उधर बारहवीं का सिलेबस दिसंबर तक पूरा नहीं होता। ऐसे में बच्चों पर दबाव आएगा। अभिभावकों का कहना है कि अभी पढ़ाई ही नहीं हुई तो पेपर कैसे देंगे, यह हमारे बच्चों पर अन्याय है।
इन सारी शिकायतों के बाद सरकार ने शिक्षा विशेषज्ञों की राय मांगी। सबसे बात करने के बाद आखिरकार दिसंबर की परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। अब से दोनों सीईटी बारहवीं की परीक्षा के बाद ही होंगी। एक परीक्षा मार्च-अप्रैल में और दूसरी अप्रैल-मई में ली जाएगी। दोनों पेपर के बीच करीब एक महीने का अंतर रखा जाएगा।
दोनों में से जिस पेपर में ज्यादा मार्क होंगे, वही गिना जाएगा। यह नियम पहले जैसा ही रखा गया है। विद्यार्थियों के लिए सलाह यही है कि पहले बोर्ड की परीक्षा शांत दिमाग से दें और उसके बाद सीईटी की तैयारी करें।