सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 08:34 IST

वडोदा इलाके में पुलिस की छापेमारी, ट्रकों में लदी सड़ी सुपारी जब्त

नागपुर ग्रामीण पुलिस ने वडोदा थाना क्षेत्र में कथित सड़ी सुपारी के कारोबार पर छापा मारा। FDA की टीम भी जांच में शामिल है।

वडोदा इलाके में पुलिस की छापेमारी, ट्रकों में लदी सड़ी सुपारी जब्त तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर ग्रामीण पुलिस ने कथित तौर पर सड़ी और खराब सुपारी के बड़े कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की है। इससे इस नेटवर्क में खलबली मच गई है। वडोदा पुलिस थाना क्षेत्र में छापेमारी हुई और कई ट्रकों में लदी सुपारी जब्त की गई। बताया गया है कि एक गोदाम पर भी कार्रवाई हुई। जब्त सुपारी की सही मात्रा, उसकी क्वालिटी, बाजार मूल्य और इस कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच चल रही है।

यह कार्रवाई नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार के मार्गदर्शन में और अपर पुलिस अधीक्षक शशांत गौड़ा के निर्देशन में हुई। मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की टीम को भी जांच के लिए बुलाया है। पुलिस और FDA की संयुक्त जांच के बाद ही साफ होगा कि सुपारी की असली हालत क्या है, उसका इस्तेमाल कहां होना था और कथित गैरकानूनी कारोबार की पूरी तस्वीर कैसी है।

हर्ष पोद्दार ने कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कुछ सड़ी सुपारी जब्त की गई है और FDA की टीम को बुलाया गया है। दोनों विभाग मिलकर आगे की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही जब्ती की मात्रा, कारोबारियों और दूसरे संभावित आरोपियों के बारे में आधिकारिक जानकारी आएगी।

जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक खराब सुपारी की सप्लाई सिर्फ नागपुर तक नहीं है। आरोप है कि नागपुर को केंद्र बनाकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, कानपुर और दूसरे राज्यों तक सुपारी भेजी जाती है। इस कथित नेटवर्क का असली आकार, सप्लाई की मात्रा और उसमें शामिल लोगों की भूमिका जांच के बाद ही पक्की हो पाएगी।

सुपारी कारोबार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इंडोनेशिया, म्यांमार और कर्नाटक से आने वाली घटिया क्वालिटी की सुपारी की खरीद-बिक्री का बड़ा नेटवर्क चल रहा है। यह भी आरोप है कि रोजाना बड़ी संख्या में ट्रकों से सुपारी नागपुर पहुंचाई जाती है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

इस कार्रवाई को अहम इसलिए माना जा रहा है कि जांच एक गोदाम या कुछ ट्रकों तक सीमित नहीं रहेगी। वह सुपारी की खरीद, ढुलाई, स्टोरेज, बिलिंग और आगे की सप्लाई तक जा सकती है। अगर कागजात में गड़बड़ी या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित लोगों और प्रतिष्ठानों पर नियम के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है।

खराब या दूषित सुपारी को लेकर सेहत की गंभीर चिंता है। सुपारी और तंबाकू वाले कई प्रोडक्ट मुंह के कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों के खतरे से जुड़े हैं। इसलिए यह देखना जरूरी है कि जब्त सुपारी किस क्वालिटी की है, क्या वह इंसानों के खाने लायक नहीं है और क्या उसे किसी खाने की चीज बनाने में लगाया जाना था।

सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी देखा जा सकता है कि यह सुपारी रजनीगंधा, विमल, पान पराग, मीठी सुपारी या दूसरे उत्पादों के निर्माण या सप्लाई के लिए थी या नहीं। फिलहाल किसी खास ब्रांड या निर्माता का जब्त माल से संबंध आधिकारिक तौर पर साबित नहीं हुआ है। इसकी पुष्टि FDA की जांच और कागजात की पड़ताल के बाद ही होगी।

इस कथित कारोबार को लेकर फर्जी GST बिल और टैक्स चोरी के आरोप भी लग रहे हैं। आरोप है कि सुपारी की खरीद-बिक्री और ढुलाई के लिए गलत या फर्जी बिलों का इस्तेमाल होता है, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हो सकता है। सूत्रों ने कर्नाटक के एक व्यक्ति का जिक्र किया है, जिसे शेट्टी नाम से बताया जा रहा है, और इंदौर में निखिल नाम के व्यक्ति का। इनकी भूमिका, कारोबारी संबंधों और किसी कथित फर्जी बिलिंग नेटवर्क में शामिल होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जांच एजेंसियों को बिल, ई-वे बिल, GST रिकॉर्ड, ट्रांसपोर्ट के कागजात और पेमेंट के रिकॉर्ड खंगालने होंगे। टैक्स गड़बड़ी के सबूत मिले तो संबंधित विभागों की भूमिका भी अहम होगी। फिलहाल टैक्स चोरी की रकम या किसी की आपराधिक जिम्मेदारी को लेकर कोई पक्का आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।

कुछ कारोबारियों और ट्रांसपोर्ट संचालकों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें अनिल जैन, अनूप नगरिया और शिवनाथ के नामों का जिक्र हो रहा है। इन लोगों के खिलाफ आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और उनकी भूमिका जांच के नतीजों से ही साफ होगी।

पुलिस को पता लगाना होगा कि सुपारी किन व्यापारियों से खरीदी गई, किन गोदामों में रखी गई, ढुलाई का इंतजाम किसने किया और माल किन राज्यों में जाना था। सूत्रों के अनुसार इस मामले में किसी अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय छोटे नेता, तथाकथित पत्रकार या दूसरे व्यक्ति की मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। जांच में सांठगांठ, अवैध वसूली या संरक्षण के सबूत मिलते हैं, तो एजेंसियों के लिए उस दिशा में कार्रवाई करना जरूरी होगा।

अब सबकी नजर FDA की जांच पर रहेगी। सुपारी के नमूने लेकर उसकी क्वालिटी, संभावित मिलावट, खराबी और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की जांच की जा सकती है। इससे तय होगा कि जब्त माल पर कौन से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। पुलिस भी ट्रांसपोर्ट के कागजात, गोदामों के रिकॉर्ड और खरीद-बिक्री के बिल देख सकती है, और जरूरत पड़ी तो दूसरे विभागों के साथ तालमेल कर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

अब सवाल यह है कि जब्त माल कहां से आया, उसे आखिर में कहां पहुंचना था, बिलिंग में गड़बड़ी थी या नहीं और इस कारोबार में कितने लोग शामिल हैं। इन सवालों के जवाब नागपुर ग्रामीण पुलिस और FDA की संयुक्त जांच के बाद ही मिलेंगे। फिलहाल पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार ने कार्रवाई की पुष्टि की है और बताया है कि जांच जारी है। आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर तय होगी।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे