रायगड में तेज गर्मी से सुपारी के बागान झुलसे, कच्चे फल गिरे, बागवानों ने मुआवजा मांगा
रायगड जिले में मई और जून की तेज गर्मी और पानी की कमी से सुपारी के कच्चे फल बड़ी तादाद में गिर गए हैं। बागवानों ने पंचनामे और आर्थिक मदद की मांग की है।
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अलीबाग: रायगड जिले में इस साल मई और जून के महीनों में पड़ी तेज गर्मी का सबसे बड़ा असर सुपारी के बागानों पर पड़ा है। पारा चालीस डिग्री के आसपास पहुंच गया और पानी की भी कमी हो गई। इसी वजह से सुपारी के पेड़ों पर लगे कच्चे फल बड़ी तादाद में नीचे गिर गए हैं।
बागवानों का अंदाजा है कि कुछ इलाकों में 50 से 70 प्रतिशत तक फल गिर चुके हैं। ऊपर से अक्टूबर की गर्मी ने पैदावार को लेकर फिक्र और बढ़ा दी है। आगे अल नीनो का असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे सुपारी की पैदावार पर और असर पड़ सकता है।
अलीबाग समेत रायगड जिले की कोंकण पट्टी में सुपारी बागवानों की अहम नकदी फसल है। साल भर बाग की देखभाल, खाद, दवा का छिड़काव और पानी के इंतजाम पर बागवान बहुत खर्च करते हैं। लेकिन इस बार तेज धूप से सुपारी के घोस झुलस गए और कच्चे फल गिरने के मामले बढ़ गए। नतीजा यह है कि जितनी कमाई की उम्मीद थी, उससे कम होने की आशंका है और बाग मालिकों को माली नुकसान झेलना पड़ रहा है।
अलीबाग तालुका नारियल सुपारी प्रक्रिया सहकारी संस्था की तरफ से मांग की गई है कि सरकार फौरन नुकसान के पंचनामे करे और आर्थिक भरपाई दे। मांग यह भी है कि कृषि विभाग प्रभावित इलाके का तुरंत सर्वे करके नुकसान दर्ज करे और पात्र बागवानों को आर्थिक मदद का ऐलान करे।
बदलता मौसम, चक्रवात, बढ़ता तापमान और पानी की अनिश्चित उपलब्धता, इन सबके चलते इन बागानों को बचाए रखना और उनसे उम्मीद के मुताबिक पैदावार लेना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
सुपारी संस्था के अध्यक्ष रमेश नाईक ने कहा, "साल भर मेहनत करके सुपारी की फसल हाथ में आने को थी, तभी तेज धूप से बड़ी तादाद में फल गिर गए। इससे बागवानों का बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। सरकार इस हालत को फौरन गंभीरता से ले, नुकसान के पंचनामे करे और बागवानों को मुआवजा दे।"
पिछले कुछ सालों में रायगड के सुपारी उत्पादकों को निसर्ग चक्रवात और उसके बाद तौते चक्रवात की भारी मार झेलनी पड़ी थी। खासकर श्रीवर्धन, मुरूड और अलीबाग तालुकों के कई सुपारी बागानों को नुकसान हुआ। तूफान में सुपारी के हजारों पेड़ उखड़ गए और कुछ बाग पूरी तरह उजड़ गए। इससे सुपारी की पैदावार पर लंबे समय तक असर रहा। उस नुकसान से उबरने की कोशिश चल ही रही थी कि अब तेज गर्मी और पानी की कमी ने बागवानों के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है।
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