वाढोणा में सिकलसेल मरीजों का शिविर, कैरम की गोटियों से समझाई आनुवंशिकता
चंद्रपुर जिले के वाढोणा प्राथमिक आरोग्य केंद्र में सेवा संकल्प अभियान के तहत लगे शिविर में 103 मरीजों की जांच हुई।
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चंद्रपुर जिले के वाढोणा के प्राथमिक आरोग्य केंद्र में सिकलसेल मरीजों के लिए आरोग्य शिविर लगाया गया। यह शिविर सेवा संकल्प अभियान के तहत राष्ट्रीय आयुष अभियान के जरिए हुआ। जिला आरोग्य अधिकारी डॉ. अशोक कटारे के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में कुल 103 मरीजों की जांच की गई।
जांच के साथ मरीजों को समुपदेशन भी दिया गया और दवाइयां बांटी गईं। शिविर की सबसे खास बात यह रही कि आनुवंशिकता को समझाने के लिए कैरम की गोटियों का इस्तेमाल किया गया, ताकि लोग बात आसानी से समझ सकें।
शिविर में बताया गया कि सिकलसेल एक आनुवंशिक रक्तविकार है। आयोजकों के मुताबिक समय पर निदान, नियमित वैद्यकीय जांच, सही दवा-इलाज, संतुलित आहार और समुपदेशन से इस बीमारी को असरदार तरीके से संभाला जा सकता है। इसी मकसद से सेवा संकल्प अभियान के तहत मरीजों को जरूरी वैद्यकीय मार्गदर्शन और समुपदेशन मुहैया कराया गया।
मरीजों की जांच नागपुर के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक डॉ. घनश्याम कोडवानी और आयुष के सहायक संचालक डॉ. धनंजय हांगे ने की। दोनों डॉक्टरों ने मरीजों की सेहत से जुड़ी शिकायतें सुनीं, उन्हें जरूरी इलाज के बारे में बताया और दवाइयां दीं।
जिला समन्वयक संतोष चात्रेश्वर ने सिकलसेल बीमारी का स्वरूप, उसके पीछे के आनुवंशिक कारण, रोकथाम के उपाय और नियमित जांच की अहमियत पर जानकारी दी। उन्होंने मरीजों के लिए उपलब्ध अलग-अलग सरकारी योजनाओं और सुविधाओं के बारे में भी बताया। चूंकि सिकलसेल आनुवंशिक बीमारी है, इसलिए उन्होंने शादी से पहले और गर्भधारण से पहले जांच कराने का महत्व भी साफ किया।
बीमारी की आनुवंशिक विरासत अगली पीढ़ी तक कैसे पहुंच सकती है, यह सहज ढंग से समझ आए, इसके लिए कैरम की गोटियों के जरिए प्रात्यक्षिक करके दिखाया गया।
शिविर में अपील की गई कि सिकलसेल के मरीज नियमित रूप से सेहत की जांच कराएं, डॉक्टर की सलाह के हिसाब से दवाइयां लें, पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित आहार लें। साथ ही बीमारी से जुड़ी कोई तकलीफ या लक्षण महसूस हो तो फौरन नजदीकी आरोग्य संस्था से संपर्क करें।
शिविर के आयोजन के लिए जिला आयुष अधिकारी डॉ. साईनाथ भोवरे, नागभीड के तालुका आरोग्य अधिकारी डॉ. अभिजित बनपूरकर, वाढोणा प्राथमिक आरोग्य केंद्र के वैद्यकीय अधिकारी डॉ. राहुल डोरलीकर और आयुष आरोग्यवर्धिनी केंद्र सावरगांव के वैद्यकीय अधिकारी डॉ. परवेज शेख ने खास मेहनत की। नागपुर के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के निवासी वैद्यकीय अधिकारी डॉ. बाळू मुंजनकर, डॉ. गजेंद्र अहिरकर, डॉ. चैतन्य चौधरी, डॉ. विवेक बोळखे और वैद्यकीय अधिकारी डॉ. सचिन सुरनार ने भी इसमें योगदान दिया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना जिला समन्वयक संतोष चात्रेश्वर ने रखी, जबकि आभार आंबोरकर ने माना।