बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
00:15 IST

नागपुर में निर्मल उज्ज्वल सोसाइटी के दफ्तर पर जमाकर्ताओं का प्रदर्शन, रकम न मिलने से नाराजगी

नंदनवन के मुख्य कार्यालय और संस्थापक सचिव के घर के बाहर सैकड़ों जमाकर्ता जुटे, पुलिस को बंदोबस्त लगाना पड़ा।

नागपुर में निर्मल उज्ज्वल सोसाइटी के दफ्तर पर जमाकर्ताओं का प्रदर्शन, रकम न मिलने से नाराजगी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर के नंदनवन में स्थित निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के मुख्यालय पर जमाकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। उनका कहना है कि फिक्स्ड डिपॉजिट और जमा की हुई रकम उन्हें वापस नहीं मिल रही। माहौल बिगड़ता देख पुलिस को दफ्तर परिसर और संस्थापक के घर के बाहर सुरक्षा बल लगाना पड़ा।

5 अक्टूबर को नंदनवन के मुख्य कार्यालय और संस्थापक सचिव प्रमोद मानमोड़े के घर के बाहर सैकड़ों परेशान जमाकर्ता इकट्ठा हो गए। इससे पहले जगनाडे चौक के अनुसूया सभागृह में संस्था की सालाना आमसभा (AGM) हुई थी। वहां भी जमाकर्ताओं और प्रबंधन के बीच तीखी बहस हो चुकी थी।

कानून-व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए नंदनवन और कोतवाली पुलिस थाने की टीमें तैनात की गईं। नंदनवन थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक कैलाश देशमाने ने पुष्टि की कि यह बंदोबस्त एहतियात के तौर पर लगाया गया था। पुलिस की भारी मौजूदगी देखकर इलाके में अफवाह उड़ गई कि आयकर विभाग ने सोसाइटी पर छापा मारा है। इससे घबराकर और खाताधारक मौके पर पहुंच गए। बाद में पुलिस ने साफ किया कि वहां कोई आयकर छापा नहीं पड़ा।

विदर्भ में इस सोसाइटी की 50 से ज्यादा शाखाएं हैं और आम लोगों व छोटे व्यापारियों के करोड़ों रुपये इसमें जमा हैं। जमाकर्ताओं की नाराजगी की कई वजहें हैं। डिपॉजिट की मैच्योरिटी पूरी हो चुकी है, फिर भी उन्हें रकम और ब्याज नहीं मिल रहा। कई खाताधारकों को दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिससे भरोसा और टूटा।

आमसभा में संस्थापक सचिव प्रमोद मानमोड़े ने आर्थिक इंतजाम ठीक करने के लिए 45 से 60 दिन का वक्त मांगा था। यह मियाद गुजर गई, पर भुगतान शुरू नहीं हुआ। फिर जानकारी सामने आई कि दिल्ली स्थित सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसायटीज ने करीब 51.70 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं को लेकर संस्था को लिक्विडेशन का नोटिस जारी किया है। इसके बाद खाताधारकों का सब्र जवाब दे गया।

जमाकर्ताओं का आरोप है कि संस्था में जमा रकम के मुकाबले कर्ज कम बांटा गया और उनके पैसे बिना इजाजत दूसरे कारोबारों में लगा दिए गए। दूसरी तरफ प्रबंधन का दावा है कि संस्था के पास काफी संपत्तियां हैं और मौजूदा दिक्कत सिर्फ Liquidity की कमी की है।

यह संकट अचानक नहीं आया है। वित्तीय अनियमितताओं और फंड के अपहार की शिकायतों के आधार पर केंद्रीय सहकारी निबंधक ने 24 अप्रैल 2026 को ही सोसाइटी के नए डिपॉजिट लेने, पुरानी एफडी का नवीनीकरण करने और नया निवेश लेने पर रोक लगा दी थी।

सोसाइटी ने इस रोक को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी। न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाळके और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की पीठ ने याचिका खारिज कर दी और रोक बरकरार रखी। अदालत ने पाया कि संस्था ने ओवरड्यू कर्जों पर मिले ब्याज को प्रॉफिट बताकर सदस्यों को गुमराह किया। अदालत के मुताबिक नियमों को किनारे रखकर पीएनजी कॉर्पोरेशन जैसी संस्थाओं को कर्ज दिया गया और करीब 317 करोड़ रुपये बिना अनुमति घाटे वाले कारोबारों में डायवर्ट कर दिए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि सोसाइटी ने नियम तोड़कर जमाकर्ताओं से करीब 1,497 करोड़ रुपये जुटाए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच SIT और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही हैं, जिन्होंने चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। अब विदर्भ के हजारों जमाकर्ता अपनी उम्र भर की कमाई वापस मिलने के लिए एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और सरकारी दखल का इंतजार कर रहे हैं।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे