75 साल की महिला की पीठ दर्द के पीछे रीढ़ का फ्रैक्चर, बलून किफोप्लास्टी से मिली राहत
ठाणे के KIMS Hospitals में डॉ. अमोघ झावर ने ऑस्टिओपोरोसिस से टूटी रीढ़ की हड्डी का इलाज बलून किफोप्लास्टी से किया और मरीज उसी दिन घर लौट गईं।
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ठाणे में एक 75 साल की महिला को करीब एक साल तक पीठ के बीच और निचले हिस्से में लगातार दर्द रहा। शुरुआत एक मामूली से गिरने की घटना के बाद हुई थी। कोई बड़ी चोट नहीं लगी थी, फिर भी दर्द जाने का नाम नहीं ले रहा था और इसका असर उनके रोजमर्रा के कामों पर पड़ रहा था।
जांच और इमेजिंग के बाद पता चला कि महिला की रीढ़ की L2 हड्डी में ऑस्टिओपोरोसिस की वजह से वर्टिब्रल कंप्रेशन फ्रैक्चर (OVCF) हुआ है। जब रीढ़ की हड्डियां कमजोर पड़ जाती हैं, तो वे दब सकती हैं या उनकी ऊंचाई घट सकती है, और इसी से वर्टिब्रल कंप्रेशन फ्रैक्चर होता है। इसके सबसे आम कारणों में से एक ऑस्टिओपोरोसिस है। ऐसे फ्रैक्चर उस मामूली चोट के बाद भी हो सकते हैं, जिससे स्वस्थ रीढ़ को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
मरीज की जांच KIMS Hospitals में हुई। ठाणे के कंसल्टेंट स्पाइन सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अमोघ झावर ने टूटी हुई रीढ़ को स्थिर करने के लिए मिनिमली इन्वेसिव स्पाइन सर्जरी की सलाह दी।
इसके बाद महिला की बलून किफोप्लास्टी की गई, जो एक आधुनिक स्पाइन सर्जरी है। इस तकनीक का मकसद टूटी हुई हड्डी को स्थिरता देना और घट चुकी ऊंचाई का कुछ हिस्सा वापस लाने में मदद करना है। इसमें त्वचा के रास्ते एक छोटा सा रास्ता बनाकर टूटी हुई हड्डी में खास तरह का बलून डाला जाता है। इस बलून को सावधानी से फुलाकर जगह बनाई जाती है, जिससे हड्डी का आकार पहले जैसा करने में मदद मिलती है। जरूरी सुधार हो जाने पर बलून निकाल लिया जाता है और हड्डी को स्थिर रखने के लिए उसमें मेडिकल बोन सीमेंट भरा जाता है।
पूरी प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया देकर करीब 30 मिनट में पूरी हुई। यह सुई जितने छोटे रास्ते से की गई, इसलिए टांके लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। मरीज उसी दिन घर जा सकीं।
इस मामले की जानकारी देते हुए डॉ. अमोघ झावर ने कहा, "ऑस्टिओपोरोसिस से होने वाला रीढ़ का फ्रैक्चर अक्सर नजरअंदाज रह सकता है, खासकर तब, जब वह मामूली लगने वाले गिरने के बाद हुआ हो। बुजुर्ग को लगातार पीठ दर्द हो, तो उसे सिर्फ उम्र की वजह से होने वाला आम दर्द मानकर टालना नहीं चाहिए। इस मरीज के मामले में इमेजिंग की मदद से रीढ़ का फ्रैक्चर पहचाना जा सका और मिनिमली इन्वेसिव तरीके से दर्द की जड़ दूर की जा सकी।"
डॉ. झावर ने यह भी कहा, "बलून किफोप्लास्टी से टूटी हुई रीढ़ को यांत्रिक स्थिरता मिलती है और उसकी ऊंचाई पहले जैसी करने में मदद हो सकती है। प्रक्रिया बहुत छोटे रास्ते से की जाती है, इसलिए सही तरह से चुने गए मरीजों को कम समय में प्रक्रिया पूरी होने और जल्दी चलना-फिरना शुरू करने का फायदा मिल सकता है। लेकिन इस प्रक्रिया से फ्रैक्चर का इलाज होता है। आगे फिर फ्रैक्चर होने का खतरा घटाने के लिए असली बीमारी ऑस्टिओपोरोसिस का इलाज भी जरूरी है।"
प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत पर नजर रखी गई। हड्डियों की ताकत बढ़ाने और आगे फ्रैक्चर का खतरा कम करने के लिए ऑस्टिओपोरोसिस का मेडिकल इलाज भी जारी रखा गया। डॉक्टर के मुताबिक फ्रैक्चर होने तक ऑस्टिओपोरोसिस के कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए यह बीमारी अक्सर पकड़ में नहीं आती। बुजुर्गों में मामूली गिरने के बाद अचानक या लगातार पीठ दर्द, शरीर की बनावट या ऊंचाई में बदलाव, या चलने-फिरने में दिक्कत हो, तो मेडिकल जांच जरूरी है।
इस मामले से यह बात सामने आती है कि बुजुर्ग मरीजों में रीढ़ के फ्रैक्चर को सिर्फ दर्द कम करने की नजर से नहीं देखना चाहिए, उसके पीछे की वजह का इलाज भी जरूरी है। डॉक्टर के मुताबिक टूटी हुई रीढ़ को स्थिर करके फौरी परेशानी दूर की जा सकती है, जबकि लंबे समय तक रीढ़ और शरीर की बाकी हड्डियों को बचाने के लिए ऑस्टिओपोरोसिस का सही इलाज बेहद जरूरी है।