रूस में संदिग्ध न्यूमोनिक प्लेग का मामला, WHO बोला रूस के बाहर खतरा बहुत कम
रूस के साइबेरिया में एक महिला कर्मचारी की मौत के बाद प्लेग की चर्चा तेज हुई, पर अधिकारियों ने अभी प्लेग की पुष्टि नहीं की है।
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कोरोना महामारी की यादें अभी ठंडी भी नहीं हुईं कि रूस के साइबेरिया इलाके से आए एक संदिग्ध न्यूमोनिक प्लेग के मामले ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इर्कुत्स्क के अँटी-प्लेग रिसर्च इंस्टिट्यूट में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी की गंभीर न्यूमोनिया के बाद मौत हो गई। इसके बाद चर्चा शुरू हुई कि उसकी मौत प्लेग से हुई होगी। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि रूस के स्वास्थ्य अधिकारियों ने अब तक प्लेग की पुष्टि नहीं की है।
अधिकारियों के मुताबिक जांच में उस महिला के संपर्क में आए लोगों में प्लेग का रोगकारक नहीं मिला। रूस की सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था ने कहा है कि महिला को अज्ञात कारण का न्यूमोनिया हुआ था और उसके काम से जुड़ा प्लेग का रोगकारक भी नहीं मिला। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि रूस में न्यूमोनिक प्लेग का उद्रेक हुआ है।
महिला को गंभीर न्यूमोनिया की वजह से अस्पताल में भर्ती किया गया था और उसके बाद उसकी मौत हो गई। कुछ रिपोर्ट में शक जताया गया कि वह प्लेग के जिंदा जीवाणुओं के संपर्क में आई थी। किसी रिपोर्ट में लैब की टेस्ट ट्यूब फूटने की बात कही गई, तो किसी में कहा गया कि वह उस इलाके के काम के दौरे पर गई थी जहां प्लेग कुदरती तौर पर पाया जाता है। इन दोनों में से कोई भी बात आधिकारिक तौर पर साबित नहीं हुई है। फिर भी एहतियात के तौर पर करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया। संपर्क में आए लोगों की जांच हुई और अब तक प्लेग के संक्रमण का कोई सबूत नहीं मिला है। कुछ संपर्कों में COVID-19 और rhinovirus मिलने की रिपोर्ट जरूर हैं। बाद में निगरानी में रखे गए बड़ी संख्या में लोगों को छोड़ दिए जाने की रिपोर्ट भी है।
प्लेग Yersinia pestis नाम के जीवाणु से होने वाली संक्रामक बीमारी है। यह जीवाणु मुख्य रूप से छोटे जानवरों और उनके पिस्सुओं में पाया जाता है। प्लेग के कई प्रकार हैं और न्यूमोनिक प्लेग को सबसे गंभीर प्रकार माना जाता है, क्योंकि यह फेफड़ों पर असर करता है। बुबोनिक प्लेग में आम तौर पर संक्रमित पिस्सू के काटने से संक्रमण होता है, जबकि न्यूमोनिक प्लेग में जीवाणु फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। यह प्रकार संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली सांस की बूंदों से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है।
इस प्रकार में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, खांसी, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिख सकते हैं। कुछ मरीजों में खांसी के साथ खून या पानी जैसा बलगम भी आ सकता है। इसे गंभीर बीमारी इसलिए माना जाता है कि इलाज न मिले तो यह तेजी से बिगड़ सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर संदिग्ध मरीज की मौत हो जाती है। आधुनिक एंटीबायोटिक्स उपलब्ध हैं, इसलिए वक्त पर पहचान और इलाज मिले तो मरीज के ठीक होने की संभावना बड़ी रहती है।
जिस जगह यह मामला सामने आया, वह खुद अँटी-प्लेग रिसर्च सेंटर है। लैब से संक्रमण की चर्चा और गंभीर न्यूमोनिया से हुई मौत ने कोरोना के शुरुआती दिनों की याद दिला दी। लेकिन WHO और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साफ किया है कि अभी इसे COVID-19 महामारी से जोड़ने की कोई वजह नहीं है। कोरोना वायरस इंसान से इंसान में बड़े पैमाने पर और लंबे वक्त तक फैला था, जबकि रूस के इस मामले में प्लेग की ही पुष्टि नहीं हुई है और संपर्क वालों में बड़ा संक्रमण नहीं मिला है।
रूसी अधिकारियों ने संपर्क खोजने, मेडिकल निगरानी, लैब टेस्ट और रोकथाम के उपाय किए हैं। उन्होंने लोगों से अफवाहों और सोशल मीडिया के बिना सबूत वाले दावों पर भरोसा न करने और आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देने की अपील की है।
WHO इस मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए है। उसने रूस से और जानकारी मांगी है, जिसमें तीव्र न्यूमोनिया का सही कारण, संबंधित रोगकारक और एक दूसरे लैब कर्मचारी को अज्ञात कारण का न्यूमोनिया होने की खबरों पर सफाई भी शामिल है। WHO के मुताबिक मौजूदा हालात में रूस के बाहर खतरा "अत्यंत कम" है। अमेरिका की CDC भी मामले पर नजर रखे है और अमेरिका की ओर से कहा गया है कि फिलहाल व्यापक खतरे के संकेत नहीं हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे इस विषय पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे, जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबिओ ने रूस से और पारदर्शी जानकारी देने की अपील की है।
भारत के बारे में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक घबराने की वजह नहीं है और फिलहाल भारत के लिए किसी बड़े खतरे के संकेत नहीं हैं। भारतीय विशेषज्ञों ने भी कहा है कि सिर्फ रूस के संदिग्ध मामले की वजह से हर बुखार या सांस की बीमारी को प्लेग मानने की जरूरत नहीं है। हां, अगर आगे चलकर रूस का मामला प्लेग साबित हुआ और बड़े पैमाने पर इंसान से इंसान में संक्रमण, कई देशों में पहुंचे मरीज या बदला हुआ रोगकारक मिला, तो हालात का नए सिरे से आकलन करना पड़ेगा।
तो क्या फिर से लॉकडाउन लगेगा? मौजूदा हालात में दुनिया भर में COVID-19 जैसे लॉकडाउन की स्थिति नहीं दिखती। एक संदिग्ध मौत और संपर्क वालों में प्लेग की पुष्टि न होना, इसे वैश्विक महामारी की शुरुआत नहीं माना जा सकता। फिर भी इस घटना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि रूसी जांच का अंतिम नतीजा क्या आता है, महिला की मौत की असल वजह क्या निकलती है, संपर्क वालों की हालत कैसी रहती है और आगे नए मरीज मिलते हैं या नहीं। WHO का "अत्यंत कम" अंतरराष्ट्रीय खतरे का आकलन भी मौजूदा सबूतों पर टिका है और हालात बदले तो स्वास्थ्य संस्थाओं का आकलन भी बदल सकता है।