सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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उबर ने शुरू किया 'रेकॉर्ड माय ट्रिप', कैब के पूरे सफर की वीडियो-ऑडियो रिकॉर्डिंग होगी

उबर ने शुरू किया 'रेकॉर्ड माय ट्रिप', कैब के पूरे सफर की वीडियो-ऑडियो रिकॉर्डिंग होगी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

उबर ने सुरक्षा के लिए 'रेकॉर्ड माय ट्रिप' फीचर लॉन्च किया है। रिकॉर्डिंग एन्क्रिप्टेड रहेगी और सिर्फ आधिकारिक जांच में मिलेगी।

ऐप से कैब बुक करने में कई लोगों को टेंशन रहती है। कभी किराए पर झगड़ा हो जाता है, कभी ड्राइवर का बर्ताव खराब निकलता है, और कभी गंभीर घटनाएं भी हो जाती हैं। इसी सबके बीच उबर ने एक नया सेफ्टी फीचर लॉन्च किया है, जिसका नाम है 'रिकॉर्ड माय ट्रिप'।

इस फीचर में कैब में बैठने से लेकर उतरने तक पूरा सफर रिकॉर्ड होगा। हाल की कुछ बुरी घटनाओं के बाद उबर को यह फैसला लेना पड़ा है। इससे नियम तोड़ने वाले या गलत बर्ताव करने वाले पर तुरंत कार्रवाई करना आसान होगा।

उबर इंडिया ने बताया कि इस फीचर का मकसद एक ही है। सफर में कुछ गलत हो जाए तो उसकी जांच ठीक से हो सके। कैब के अंदर की वीडियो और आवाज, दोनों रिकॉर्ड होंगी, लेकिन यह रिकॉर्डिंग पूरी तरह एन्क्रिप्टेड रहेगी।

इसका मतलब यह है कि सफर के दौरान या उसके बाद न ड्राइवर, न आप, और न खुद उबर कंपनी यह फुटेज सीधे देख पाएगी। फुटेज लॉक रहेगा। तो फिर देखेगा कौन? अगर सफर में झगड़ा हुआ या कोई गलत घटना घटी, तो पुलिस या कानूनी जांच करने वाली एजेंसी आधिकारिक तौर पर मांग करके यह फुटेज ले सकेगी। इस तरह यह सबूत के तौर पर काम आएगा।

इतना ही नहीं, पैसेंजर को अपने ऐप से खुद रिकॉर्डिंग शुरू करने का ऑप्शन भी मिलेगा। इससे उबर के सफर में पारदर्शिता आएगी और गलत करने वालों में डर रहेगा।

गुरुग्राम की एक घटना के बाद यह मुद्दा ज्यादा चर्चा में आया। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर महिला दिल्ली एयरपोर्ट से गुरुग्राम अपने घर जा रही थीं। उन्होंने उबर बुक की थी और ऐप पर किराया 625 रुपये दिख रहा था।

घर पहुंचने पर ड्राइवर ने दूसरा ऐप दिखाकर 1,479 रुपये मांगे। महिला ने ज्यादा पैसे देने से मना किया तो ड्राइवर ने उनका सामान गाड़ी में ही रोक लिया। उसने गाली-गलौज की, घर तक उनका पीछा किया और जान से मारने की धमकी भी दी।

पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करके यासिर नाम के 24 साल के ड्राइवर को गिरफ्तार किया। वह फर्जी नाम से अकाउंट चला रहा था। उबर ने भी उसे हमेशा के लिए हटा दिया।

ड्राइवर की झूठी पहचान का प्रॉब्लम नोएडा और दूसरे शहरों में भी आ रहा है। ऐप पर नाम कुछ और दिखता है और गाड़ी चलाने वाला कोई और होता है। लाइसेंस पर नाम अलग, ऐप पर अलग। इसी वजह से दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका डाली गई है। कोर्ट ने कंपनियों और सरकार से कहा है कि ड्राइवर की पूरी जांच की जाए, ऐप पर उसकी असली पहचान दिखाई जाए, गाड़ी कहां जा रही है यह ट्रैक किया जाए और SOS बटन दबाते ही फौरन मदद दी जाए। ये सब अनिवार्य नहीं, बल्कि जरूरी किया जाए।

सिर्फ सेफ्टी ही नहीं, उबर ने ड्राइवरों के लिए कमाई के नए रास्ते भी निकाले हैं। अब ड्राइवर सिर्फ सवारी ही नहीं, पार्सल भी पहुंचा सकता है, पालतू जानवरों को ले जा सकता है और कुछ शहरों में उबर बाइक भी चला सकता है। उनके लिए 'Earn First, Pay Later' नाम का पास लाया गया है, यानी पहले कमाओ और बाद में पास के पैसे भरो। इससे नए ड्राइवरों को भी काम शुरू करना आसान होगा।

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