धनतेरस से पहले सोना जनवरी के रिकॉर्ड से सस्ता, 1 लाख रुपये में अब करीब 7.1 ग्राम
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दिवाली करीब है और धनतेरस पर सोना खरीदने वालों को जनवरी के मुकाबले राहत है, पर पिछले साल की धनतेरस के भाव से सोना अब भी महंगा है।
दिवाली नजदीक आ रही है और उसका अहम त्योहार धनतेरस भी दूर नहीं। भारत में इस वक्त सोने की खरीदारी बड़े पैमाने पर होती है, क्योंकि इस दिन खरीदा गया सोना शुभ माना जाता है। इस साल धनतेरस पर सोना लेने का सोच रहे हैं तो मौजूदा भाव से थोड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि सोना जनवरी 2026 के उच्चांक से काफी नीचे आ चुका है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक 24 कैरेट सोने का भाव अभी 1,40,054 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 29 जनवरी को यही भाव 1,75,340 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी सोना जनवरी के रिकॉर्ड उच्चांक से करीब 20 प्रतिशत नीचे है। जनवरी के आखिर में 1,00,000 रुपये में लगभग 5.7 ग्राम 24 कैरेट सोना आता था, जबकि आज उतने ही पैसों में लगभग 7.1 ग्राम मिल जाता है।
एमसीएक्स पर गिरावट इससे भी बड़ी है। MCX के आंकड़ों के हिसाब से दिसंबर का सोना वायदा शुक्रवार को 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। जनवरी में यह 1,80,779 रुपये के उच्चांक पर था, यानी वहां से करीब 23 प्रतिशत की गिरावट आई है।
लेकिन जनवरी से सस्ता होने का मतलब यह नहीं कि सोना हर लिहाज से सस्ता है। पिछली धनतेरस से पहले के आखिरी कामकाजी दिन, 17 अक्टूबर 2025 को IBJA के मुताबिक 24 कैरेट सोना 1,29,584 रुपये प्रति 10 ग्राम था। उस भाव पर 1 लाख रुपये में 7.7 ग्राम सोना मिलता। अब सोना करीब 8 प्रतिशत महंगा है, इसलिए उतने ही पैसों में करीब 7.5 प्रतिशत कम सोना मिलेगा।
जिन निवेशकों ने पिछली धनतेरस पर सोना खरीदा था, वे अब भी कुछ मुनाफे में हैं। वहीं जनवरी के ऊंचे भाव पर खरीदने वालों को करीब 20 प्रतिशत का नुकसान हो रहा है, क्योंकि तब लगाए गए 1 लाख रुपये की कीमत आज अंदाजन 79,900 रुपये रह गई है। ये भाव बेंचमार्क दरें हैं और इनमें 3 प्रतिशत जीएसटी और गहने बनवाने का शुल्क शामिल नहीं है।
तो अब निवेश करें या रुकें? कई विश्लेषकों का कहना है कि बाजार की यह गिरावट लंबे वक्त के निवेशकों के लिए मौका है, पर इसका मतलब यह नहीं कि सारा पैसा एक साथ लगा दिया जाए। इक्विट्रस्ट सोल्यूशन्स के संस्थापक शिवा ग्रोवर ने कहा है कि नया निवेश एक साथ करने के बजाय किस्तों में करना चाहिए। उनके मुताबिक कई साल का नजरिया रखने वालों के लिए यह गिरावट कुछ अच्छे मौके लाई है। साथ ही उन्होंने चेताया कि जब तक अमेरिका के केंद्रीय बैंक का रुख साफ नहीं होता, बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
जनवरी के 1,75,340 रुपये के मुकाबले 1,40,054 रुपये पर सोना भले आकर्षक लगे, पर बाजार यहां से और नीचे जाएगा या फिर उछलेगा, इसका सटीक अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। अगर आपने पूरे 1,00,000 रुपये सोने में लगा दिए और भाव 5 प्रतिशत और गिर गए, तो नुकसान होगा। लेकिन यही रकम 4 या 5 महीने की SIP में बांट दें, तो भाव गिरने पर हर महीने उतने ही पैसों में ज्यादा ग्राम सोना मिलेगा। वित्त की भाषा में इसे रुपया कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं।
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