मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:46 IST

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने 17 दिन में 543 अवैध निर्माण तोड़े

दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में सामने आया कि जो PG बिल्डिंग गिरी थी उसका कोई सैंक्शंड प्लान ही नहीं था।

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने 17 दिन में 543 अवैध निर्माण तोड़े
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पेइंग गेस्ट (PG) बिल्डिंग गिरने के बाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) ने सिर्फ 17 दिन के अंदर 543 प्रॉपर्टीज पर बुलडोजर चला दिया। यह जानकारी MCD की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल एक कंप्लायंस एफिडेविट से मिली है।

एफिडेविट के मुताबिक 6 सितंबर से 23 सितंबर 2026 के बीच MCD ने अवैध निर्माण के खिलाफ यह कार्रवाई की। इस दौरान 543 प्रॉपर्टीज डिमॉलिश की गईं, 178 प्रॉपर्टीज को सील किया गया और 354 को शो-कॉज नोटिस थमाए गए। इसके अलावा इसी 17 दिन की अवधि में सिविक बॉडी ने 205 सीलिंग शो-कॉज नोटिस और 98 डिमॉलिशन ऑर्डर भी जारी किए।

यह एफिडेविट MCD के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) हेडक्वार्टर अजय कुमार जैन ने 24 सितंबर को हाई कोर्ट के सामने दाखिल किया। दरअसल हाई कोर्ट ने 7 सितंबर को MCD को निर्देश दिया था कि वह इस हादसे में शामिल बिल्डिंग की परमिशन और सैंक्शन स्टेटस की जांच करे, अगर वायलेशन मिलें तो जिम्मेदारी तय करे और अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी PG हॉस्टलों का इंस्पेक्शन कराए। यह एफिडेविट उसी निर्देश के पालन में दाखिल किया गया है।

एफिडेविट में एक बड़ा खुलासा भी हुआ है। MCD ने बताया कि 6 सितंबर को गिरी बिल्डिंग, यानी सत्य निकेतन की प्रॉपर्टी नंबर 14, के पास कभी भी सिविक बॉडी से अप्रूव्ड सैंक्शंड बिल्डिंग प्लान था ही नहीं।

एफिडेविट के अनुसार इस बिल्डिंग की ग्राउंड फ्लोर, पहली और दूसरी मंजिल के साथ-साथ तीसरी मंजिल का कुछ हिस्सा 1970-1980 के दौरान बनाया गया था। इसके बाद बेसमेंट और तीसरी मंजिल का बचा हुआ हिस्सा 1997-98 में बनवाया गया।

MCD ने इस स्ट्रक्चर को लोड-बेयरिंग बिल्डिंग बताया है, जिसमें RCC फ्रेम नहीं था और जिसकी ईंट की दीवारें सिर्फ करीब 4.5 इंच मोटी थीं। एफिडेविट में साफ कहा गया है कि यह प्रॉपर्टी MCD की किसी भी वैध परमिशन के मुताबिक नहीं बनाई गई थी।

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