सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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मंगलुरु में बाइक पर चलता-फिरता पंक्चर सेंटर, Rs 60,000 में खड़ा किया पूरा सेटअप

मंगलुरु में बाइक पर चलता-फिरता पंक्चर सेंटर, Rs 60,000 में खड़ा किया पूरा सेटअप तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

मंगलुरु में एक शख्स ने अपनी बाइक पर ही पंक्चर रिपेयर की पूरी सुविधा लगा ली है और शहर में घूम-घूमकर ग्राहकों तक पहुंचता है।

गाड़ी का टायर पंक्चर हो जाए तो पंक्चर की दुकान ढूंढनी पड़ती है, और दुकान दूर हो तो गाड़ी धकेलकर ले जाने की नौबत आ जाती है। मंगलुरु के एक शख्स ने इस झंझट का अलग ही हल निकाला है। उन्होंने अपनी बाइक पर ही पंक्चर रिपेयर का सेंटर बना लिया है और पूरे शहर में घूमकर ग्राहकों को सर्विस देते हैं। एक बाइक से शुरू हो सकने वाला यह धंधा इन दिनों खूब चर्चा में है।

CEO आकाश गुप्ता ने सोशल मीडिया पर इस अनोखे काम का वीडियो शेयर किया है। मंगलुरु की सड़कों पर उन्हें यह शख्स बाइक पर पंक्चर रिपेयर की सर्विस देता दिखा, तो उन्होंने रुककर उससे बात की और धंधे के बारे में जानकारी ली।

रोज कितने पंक्चर निकाल लेते हो, यह पूछने पर उस शख्स ने बताया कि दिन में करीब 20 पंक्चर बन जाते हैं। एक पंक्चर के वह Rs 200 लेते हैं। इस हिसाब से दिन में 20 पंक्चर मिल जाएं तो कुल Rs 4,000 की कमाई हो सकती है। हालांकि पेट्रोल, सामान और दूसरे खर्च निकालने के बाद असल में कितना मुनाफा बचेगा, यह इस पर टिका है कि कितना काम मिलता है।

इस धंधे की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए बड़ी दुकान या अलग जगह की जरूरत नहीं पड़ती। उस शख्स के मुताबिक बाइक पर पंक्चर रिपेयर का पूरा इंतजाम करने में करीब Rs 60,000 खर्च हुए। बाइक अपनी ही थी, इसलिए अलग गाड़ी खरीदने का खर्च भी बच गया।

बाइक के पीछे वाले हिस्से में पंक्चर सुधारने की मशीन और बाकी सामान लगाया गया है। इसलिए जहां ग्राहक की गाड़ी बंद पड़ती है, वहीं पहुंचकर मरम्मत हो जाती है। ग्राहक को खुद दुकान तक जाने की जरूरत नहीं रहती।

उन्होंने बताया कि वह सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक काम करते हैं। इतना लंबा वक्त मिलने से अलग-अलग समय पर सड़क पर फंसे वाहन वालों की मदद करना मुमकिन हो जाता है। दोपहिया हो, कार हो या कोई और गाड़ी, टायर पंक्चर होने पर फौरन मदद मिलना बहुत मायने रखता है, और ऐसे में ग्राहक के पास पहुंचने वाली मोबाइल पंक्चर सर्विस काम आ सकती है। सही जगह पर प्रचार, फोन पर बुकिंग और वक्त पर सर्विस दी जाए तो ग्राहक मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

आकाश गुप्ता ने वीडियो के कैप्शन में यह धंधा शुरू करने के इच्छुक लोगों को मदद की पेशकश भी की है। उन्होंने लिखा है कि दिल्ली-NCR, बंगलुरु, जयपुर और मुंबई जैसे शहरों में जो लोग यह काम शुरू करना चाहते हैं, वे संपर्क करें। उनके प्रस्ताव में धंधे के लिए बाइक बिना किसी निवेश के उपलब्ध कराने की बात भी है। इस ऑफर की शर्तें और पात्रता संबंधित व्यक्ति से अलग से पूछकर पक्की कर लेना जरूरी है।

कुल मिलाकर यह धंधा कम पूंजी और ग्राहक की जरूरत के हिसाब से सर्विस देने के आइडिया पर खड़ा हुआ है। बड़ी दुकान खोलने के बजाय सीधे ग्राहक तक पहुंचने का यह तरीका दूसरे शहरों में भी काम आ सकता है। शुरू करने से पहले औजारों का खर्च, गाड़ी की सुरक्षा, स्थानीय नियम, सर्विस चार्ज और संभावित मुनाफे का हिसाब लगा लेना अहम है।

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